रूपेश कुमार, लातेहार : झारखंड में कई ऐसे सुदूर व उग्रवाद प्रभावित गांव हैं जहां आज भी बैंकिग सुविधा उपलब्ध नहीं है। लातेहार जिला के उग्रवाद प्रभावित महुआडांड़ प्रखंड स्थित लोध गांव में बैंक नहीं होने के कारण ग्रामीणों को 15 किमी की दूरी तय कर महुआडांड़ जाना पड़ता था। जिससे उन्हें पैसे और समय का नुकसान तो होता ही था साथ ही आपातकालीन अवस्था में पैसे निकालने में काफी कठिनाई भी होती थी। लेकिन अब सुदूर गांवों में बैंकिग कोरेस्पोंडेंट (बीसी) सखी लोगों को घर में बैंकिंग सुविधा उपलब्ध करा रही हैं। फिलहाल महुआडांड़ प्रखंड के लोध गांव में 29 वर्षीय सुनीता, चंदवा प्रखंड के मोनिषा उरांव, लातेहर पांडेयपुरा में किरण भारती, हेठबेसरा में सबिता प्रवीण, भूसुर में आशा देवी व बारियातू प्रखंड में सबिता देवी समेत दर्जनों कोरेस्पोंडेंट सखी सेवाएं दे रहीं हैं। गांव में सही से नेटवर्क न होने के कारण वह अपने मोबाईल को घर के छत पर रख कर उसे अपने लैपटॉप से जोड़ कर पैसे की निकासी एवं जमा करती हैं। अब गांव के बुजुर्गो को भी बिना किसी कठिनाई के अपने गांव में ही वृद्धा पेंशन उपलब्ध हो रहा है। 47 बैंकिग कोरेस्पोंडेंट सखी कर रही काम

लातेहार जिले में 47 बैंकिग कोरेस्पोंडेंट सखी काम कर रही है। जिनमे वर्तमान समय में 30 बैंकिग कोरेस्पोंडेंट सखी क्षेत्र में कार्यरत हैं वहीं 17 बैंकिग कोरेस्पोंडेंट सखी ट्रेनिंग ले रही हैं। गांव के सखी मंडल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए सबसे पहले समूह से जुड़ना पड़ता है। उसके बाद महिलाओं को चार पार्ट में बैंकिग कोरेस्पोंडेंट सखी बनने के लिए प्रशिक्षण दी गई। उसके बाद गांव के बुजुर्गों को लाभ देने के लिए महिलाओं को समूह के माध्यम से लोन लेकर कम्प्यूटर खरीदकर गांव में जाकर सेवा देती है। एक वर्ष से कर रही काम उग्रवाद प्रभावित गांव में पहले फेज में 47 कोरेस्पोंडेंट सखी एक वर्ष से कार्य कर रही है। इनके कार्य को देखकर आसपास के गांव वाले भी जागरूक होकर बैंकिग सेवा का लाभ लेने के लिए घर पर भी पहुंच जा रहे हैं। बीसी सखी बन रहीं आत्मनिर्भर गांव के समूह महिलाओं को बैंकिग कोरेस्पोंडेंट सखी बना कर गांव के ग्रामीणों को बैंक सेवा के लाभ से जोड़ने के लिए सर्विस चार्ज के एवज में पच्चीस सौ से तीन हजार रुपए प्रति माह कमा लेती है। जिससे वह अपने पैर में खड़ा होकर आत्मनिर्भर बन रही है। बैंक से जुड़ कर करती है काम बैंकिग कोरेस्पोंडेंट सखी ग्रामीण बैंक आईडीएफसी बैंक व पंजाब नेशनल बैंक से जुड़कर काम कर रही है। पेंशन धारियों को आधार कार्ड के माध्यम से अंगूठा लगाकर पैसे की निकासी व जमा कराती है। उग्रवाद प्रभावित गांव की नौवीं एवं दसवीं कक्षा पास महिलाओं को ही कोरेस्पोंडेंट सखी बनाया गया है। आज वर्तमान समय के परिवेश में गांव में महिलाओं के हाथों में बागडोर संभाली हुई है।

Posted By: Jagran

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