कोडरमा, जागरण संवाददाता। माइका क्षेत्र में इसबार हारे हुए प्रत्याशी का मुकाबला शिकस्त खाए उम्मीदवार से ही है। जीत वाले किनारे कर दिए गए हैं। सितारा भले ही गर्दिश में चल रहा है, लेकिन साहब बड़े नेता हैं, इसमें कोई संदेह नहीं। साल 2014 में सिलसिलेवार तरीके से तीन चुनाव हार गए। क्षेत्र बदलकर लोकसभा चुनाव में पराजय देखी, फिर गृहजिले में ही दो-दो जगहों से विधानसभा चुनाव भी हार गए।

इस बार फिर घर वापसी की है। वहीं मैडम भी पिछली दफा पहली बार हार का मुंह देखी है। इसबार दल बदलकर मैदान में है। एक तीसरे प्रत्याशी भी हैं जो लगातार मैदान में हार का सामना कर रहे हैं। पिछली दफा किसी तरह छोटे सदन में प्रवेश का मौका मिला। इसबार फिर मैदान में ताल ठोंककर खड़े हैं। ऐसे में यहां जीत की जंग सभी हारे हुए नेताओं के बीच ही छिड़ी है।

साहब को विभीषणों पर भरोसा

प्रतिद्वंद्वी के मुकाबले साहब की सेना बेहद छोटी है। सुविधा-संसाधन से भी काफी कम। चाल भी कछुआ वाली चल रहे हैं, लेकिन आत्मविश्वास से लबरेज हैं। भरोसा अपनों पर नहीं, दूसरे खेमे में छिपे विभीषणों पर है। पुराने संगठनकर्ता रहे हैं। सितारा भले ही गर्दिश में चल रहा है, लेकिन हर जगह चाहनेवाले हैं।

परिस्थिति कुछ ऐसी बनी है कि निगेटिव एनर्जी ज्यादा उत्सर्जित हो रही है और साहब की ओर खुद ब खुद आकर्षित होती जा रही है। ऐसे ही निगेटिव एनर्जी को ज्यादा से ज्यादा अपने पक्ष में समेटकर उसे अपने लिए पॉजीटिव बनाने पर साहब का सारा जोर है।

Posted By: Sujeet Kumar Suman

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप