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World Tourism Day: अभ्रक नगरी की अनदेखी वादियां, जानिए कोडरमा के उन 5 खूबसूरत स्थलों का सच, जो आज भी हैं दुनिया की नजरों से दूर

Published: Sun, 27 Sep 2026 07:00 AM (IST)

विश्व पर्यटन दिवस पर कोडरमा की प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक स्थलों की चर्चा की गई है, जो अपनी खूबसूरती के बावजूद सुविधाओं और प्रचार-प्रसार की राह देख रहे हैं।

झारखंड के कोडरमा में स्थित धनिया पहाड़ी अपनी प्राचीन शैल नक्काशी (चट्टानों पर उकेरी गई आकृतियों) और समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है।

झारखंड के कोडरमा में स्थित धनिया पहाड़ी अपनी प्राचीन शैल नक्काशी (चट्टानों पर उकेरी गई आकृतियों) और समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है।

HighLights

  1. कोडरमा में तिलैया डैम, वृंदाहा जलप्रपात जैसे कई खूबसूरत स्थल हैं।

  2. ये स्थल प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम हैं।

  3. पर्यटन विकास से स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

अरविंद चौधरी, झुमरीतिलैया (कोडरमा)। प्रकृति ने कोडरमा जिले को खूबसूरती का ऐसा अनमोल खजाना सौंपा है, जहां ऊंचे पहाड़ हैं, कलकल बहते झरने हैं, विशाल जलाशय हैं, चारों ओर फैली हरियाली है और गहरी धार्मिक आस्था से जुड़े अनेक ऐतिहासिक स्थल भी हैं। 
 
इसके बावजूद, जिले के कई प्रमुख पर्यटन स्थल आज भी देश और दुनिया की नजरों से काफी हद तक ओझल हैं। आवश्यकता है इन अनछुए स्थलों की प्राकृतिक खूबसूरती को सही पहचान देने और उन्हें राष्ट्रीय पर्यटन के नक्शे पर मजबूती से स्थापित करने की।
 
हर वर्ष 27 सितंबर को 'विश्व पर्यटन दिवस' के रूप में मनाया जाता है। इस अंतरराष्ट्रीय दिवस का मुख्य उद्देश्य पर्यटन के महत्व तथा इसके आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक योगदान के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। 
 
इस अवसर पर कोडरमा के उन खूबसूरत स्थलों को याद करना प्रासंगिक हो जाता है, जो प्राकृतिक सौंदर्य और आस्था का संगम होने के बावजूद बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और व्यापक प्रचार-प्रसार की राह देख रहे हैं।
 
कोडरमा को भले ही विश्व स्तर पर ‘माइका नगरी’ (अभ्रक नगरी) के रूप में जाना जाता हो, लेकिन इसकी वास्तविक पहचान केवल खनिज संपदा तक सीमित नहीं है। 
 
तिलैया डैम, ध्वजाधारी पहाड़ी, चंचला देवी मंदिर, वृंदाहा जलप्रपात, पेट्रो फॉल्स और झरना कुंड जैसे स्थल इस जिले की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत को बेहद समृद्ध बनाते हैं।
 

1. तिलैया डैम: पानी, पहाड़ और हरियाली का अद्भुत संगम 

कोडरमा का नाम आते ही तिलैया डैम का मनमोहक दृश्य सबसे पहले आंखों के सामने उभरता है। बराकर नदी पर वर्ष 1953 में निर्मित यह डैम जिले का सबसे प्रमुख और लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। 
 
लगभग 36 वर्ग किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में फैला इसका शांत जलाशय चारों ओर से हरी-भरी पहाड़ियों से घिरा हुआ है। करीब 1200 फीट लंबे बांध का नजारा यहां आने वाले पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है। 
 
यहां आने वाले पर्यटक न केवल नौका विहार (बोटिंग) का आनंद लेते हैं, बल्कि आसपास के धार्मिक और प्राकृतिक वातावरण में शांति का अनुभव भी करते हैं।
 

2. चंचला देवी मंदिर: आस्था और प्राचीन परंपरा का केंद्र 

कोडरमा-गिरिडीह मार्ग पर लगभग 400 फीट की ऊंचाई पर स्थित चंचला देवी मंदिर धार्मिक पर्यटन का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। शक्ति स्वरूपा देवी दुर्गा को समर्पित इस मंदिर में वर्षभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।
 
मंदिर के समीप स्थित एक प्राकृतिक गुफा में नक्काशीदार पत्थर की चार प्राचीन मूर्तियां मुख्य आकर्षण हैं। यह स्थल श्रद्धालुओं के बीच मुंडन संस्कार और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पूरे क्षेत्र में विख्यात है।
 

3. वृंदाहा जलप्रपात: गझंडी के जंगलों में प्रकृति का संगीत 

कोडरमा की प्राकृतिक सुंदरता की चर्चा गझंडी क्षेत्र में स्थित वृंदाहा जलप्रपात के बिना अधूरी मानी जाती है। घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच से गिरता यह झरना विशेषकर मानसून के मौसम में अत्यंत जीवंत और सुंदर हो जाता है।
 
वर्तमान में यह जलप्रपात केवल स्थानीय निवासियों के लिए ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों बिहार और पश्चिम बंगाल से आने वाले पर्यटकों के लिए भी एक पसंदीदा पिकनिक स्पॉट बन चुका है। हालांकि, पर्यटकों की बढ़ती संख्या के बावजूद यहां बुनियादी सुविधाओं का विकास होना अभी बाकी है।
 

4. पेट्रो जलप्रपात: सतगावां की मनमोहक प्राकृतिक छटा 

सतगावां क्षेत्र में स्थित पेट्रो जलप्रपात जिले के सबसे शांत और खूबसूरत प्राकृतिक स्थलों में से एक है। लगभग 40 फीट की ऊंचाई से गिरती पानी की धारा, चारों ओर फैली हरी-भरी वनस्पतियां और नीचे बना प्राकृतिक कुंड इसकी खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं।
 
प्रकृति की गोद में कुछ समय बिताने के शौकीन लोगों के लिए यह एक बेहतरीन स्थान है, लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए बेहतर सड़कें, पेयजल, सुरक्षा और स्वच्छता जैसी मूलभूत सुविधाएं विकसित करने की सख्त जरूरत है।
 

5. ध्वजाधारी पहाड़ी: प्राकृतिक शांति के बीच गूंजती भक्ति 

कोडरमा रेलवे स्टेशन से मात्र 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ध्वजाधारी पहाड़ी धार्मिक आस्था और प्राकृतिक शांति का एक अद्भुत संगम है। पहाड़ी की चोटी पर भगवान शिव का प्राचीन मंदिर स्थापित है।
 
शहर की भागदौड़ से दूर इस पहाड़ी का शांत वातावरण श्रद्धालुओं और शांति प्रिय पर्यटकों को बेहद सुकून देता है। यदि इस स्थल को सुनियोजित ढंग से विकसित किया जाए, तो यह राज्य का एक प्रमुख इको-टूरिज्म केंद्र बन सकता है।
 

पर्यटन विकास, योजनाएं और रोजगार के नए अवसर 

कोडरमा में पर्यटन की असीम संभावनाएं हैं, जिन्हें केवल योजनाबद्ध क्रियान्वयन की आवश्यकता है। जिला प्रशासन द्वारा उरवा में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 2 करोड़ 38 लाख रुपये की लागत से एक आधुनिक एडवेंचर पार्क का निर्माण कराया गया है। 
 
इसके अलावा, वृंदाहा जलप्रपात को भी आधिकारिक पर्यटन स्थल के रूप में अधिसूचित कर विकसित करने की पहल की गई है। पर्यटन का सीधा संबंध स्थानीय अर्थव्यवस्था से होता है। 
 
यदि कोडरमा के इन प्राकृतिक और धार्मिक स्थलों पर पक्की सड़कें, सुरक्षा व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल, शौचालय, प्रकाश और गाइड जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, तो इससे स्थानीय युवाओं के लिए परिवहन, होटल, खान-पान, हस्तशिल्प और गाइड सेवाओं में बड़े पैमाने पर नए रोजगार पैदा होंगे।
 
विश्व पर्यटन दिवस पर जरूरत इस बात की है कि कोडरमा की इन अनदेखी वादियों, झरनों और धार्मिक धरोहरों को संरक्षण, सुविधा और व्यापक पहचान दी जाए।
 
ठोस सरकारी नीति और स्थानीय सहयोग के बल पर कोडरमा आने वाले समय में झारखंड का एक प्रमुख पर्यटन हब बनकर उभर सकता है।