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कोडरमा घाटी से निकलते वक्त अलर्ट रहें, रफ्तार और लापरवाही से सितंबर में पांच बड़े हादसे

Published: Sat, 19 Sep 2026 06:15 PM (IST)

बिहार-झारखंड को जोड़ने वाली कोडरमा घाटी में तेज रफ्तार और नियमों की अनदेखी के कारण सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं, ...और पढ़ें

36 घुमावदार मोड़ और 40 किमी की गति सीमा, फिर भी नियमों की अनदेखी बन रही जानलेवा।

36 घुमावदार मोड़ और 40 किमी की गति सीमा, फिर भी नियमों की अनदेखी बन रही जानलेवा।

HighLights

  1. कोडरमा घाटी में 18 दिनों में पांच बड़ी सड़क दुर्घटनाएं हुईं।

  2. तेज रफ्तार और सुरक्षा नियमों की अनदेखी हादसों की मुख्य वजह।

  3. घाटी में 36 घुमावदार मोड़, 40 किमी/घंटा गति सीमा निर्धारित।

संवाद सूत्र, कोडरमा। बिहार-झारखंड को जोड़ने वाली कोडरमा घाटी से गुजरना इन दिनों किसी चुनौती से कम नहीं है। 16 किलोमीटर लंबी इस घाटी में 36 तीखे और घुमावदार मोड़ हैं। ऐसे में जरा सी चूक, तेज रफ्तार या गलत तरीके से ओवरटेक करना जिंदगी पर भारी पड़ सकता है। यही वजह है कि सड़क सुरक्षा के लिहाज से कोडरमा घाटी को जिले का सबसे संवेदनशील मार्ग माना जाता है।

हाल के दिनों में यहां सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या ने चिंता और बढ़ा दी है। पिछले 18 दिनों में घाटी में पांच बड़ी सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इन हादसों में कई लोगों की जान गई, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए हैं।

घाटी में वाहन चालकों को सावधान करने के लिए जगह-जगह साइनेज और चेतावनी संदेश लगाए गए हैं। विभागीय स्तर पर घाटी में वाहनों की अधिकतम गति सीमा 40 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है।

इसके बावजूद कई वाहन चालक तेज गति से वाहन चलाने और खतरनाक तरीके से ओवरटेक करने से बाज नहीं आते। घुमावदार मोड़ पर सामने से आने वाले वाहन का अंदाजा नहीं लग पाता और यही लापरवाही कई बार भीषण हादसे में बदल जाती है।

सुरक्षा नियमों की अनदेखी बनी हादसों की वजह

कोडरमा घाटी में सड़क दुर्घटनाओं के पीछे तेज रफ्तार के साथ सुरक्षा नियमों की अनदेखी भी बड़ी वजह बन रही है। तीखे मोड़, ढलान, चढ़ाई और ब्लैक स्पॉट को चिह्नित करने के बावजूद चालक कई बार निर्धारित गति सीमा का पालन नहीं करते।

खासकर भारी वाहनों के लिए ढलान वाले हिस्से में तेज गति बेहद खतरनाक साबित होती है। विडंबना यह है कि गति सीमा लागू होने के बावजूद घाटी में वाहनों की रफ्तार पर प्रभावी निगरानी की व्यवस्था नहीं है।

कोडरमा पुलिस को इंटरसेप्टर वाहन मिला है, लेकिन इसका इस्तेमाल नियमित रूप से वाहनों की गति मापने के बजाय यातायात निरीक्षक के सरकारी वाहन के रूप में किए जाने की बात सामने आती रही है। ऐसे में गति सीमा के उल्लंघन पर कार्रवाई की प्रभावी व्यवस्था पर सवाल उठते हैं।

छह माह में 55 दुर्घटनाएं, 30 की मौत

सड़क सुरक्षा की स्थिति का अंदाजा जिले में हुए हादसों के आंकड़ों से भी लगाया जा सकता है। 2026 के शुरुआती छह महीनों में कोडरमा जिले में 55 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 30 लोगों की मौत हो चुकी है।

जुलाई से अब तक कोडरमा घाटी में भी कई बड़ी दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें करीब आधा दर्जन लोगों की जान गई और दर्जनों घायल हुए। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, सड़क हादसों में 2025 में 127, 2024 में 99, 2023 में 100, 2022 में 137, 2021 में 87 और 2020 में 88 लोगों की मौत हुई थी।

लगातार हो रहे हादसे बताते हैं कि केवल चेतावनी बोर्ड लगाना पर्याप्त नहीं है। घाटी में गति नियंत्रण, निगरानी, सड़क मरम्मत और दुर्घटना संभावित स्थानों पर प्रभावी सुरक्षा इंतजाम जरूरी हैं।