कोडरमा, जासं। कोडरमा लोकसभा क्षेत्र लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ रहा है। हालांकि यह गढ़ अभेद्य नहीं रहा है। कई चुनावों में कांग्रेस व अन्य दल भाजपा के इस गढ़ को ढहाकर अपना झंडा गाड़ने में कामयाब रहे हैं। वर्तमान में एक बार फिर दूसरे दलों के समक्ष यही चुनौती है। कोडरमा लोकसभा 1977 में अस्तित्व में आया। इससे पूर्व कोडरमा जिला चतरा लोकसभा का हिस्सा हुआ करता था। 1977 में पहली बार अस्तित्व में आए इस लोकसभा क्षेत्र में पहली बार राष्ट्रीय लोकदल के उम्मीदवार के रूप में रीतलाल प्रसाद वर्मा यहां से सांसद बने थे।

इसके बाद रीतलाल प्रसाद वर्मा 1980 में पुन: यहां से जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में सांसद बने। 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए चुनाव में पहली बाद कांग्रेस की लहर में यहां से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में तिलकधारी प्रसाद ¨सह सांसद बने। लेकिन 1989 में पुन: यह सीट भाजपा उम्मीदवार के रूप में रीतलाल प्रसाद वर्मा ने झटक ली। इसके बाद 1991 के मध्यावधि चुनाव में पहली बाद गैर भाजपाई-गैर कांग्रेसी जनता दल के उम्मीदवार के रूप में मुमताज अंसारी सांसद बने।

1996 के आम चुनाव और 1998 के मध्यावधि चुनाव में लगातार रीतलाल प्रसाद वर्मा ने अपनी जीत दर्ज की। लेकिन 1999 के मध्यावधि चुनाव में कड़े मुकाबले में कांग्रेस के तिलकाधारी ¨सह एक बार फिर यहां कांग्रेस का झंडा बुलंद करने में कामयाब रहे। 2004 में रीतलाल प्रसाद वर्मा की मौत के बाद पहली बार पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने यहां ऐतिहासिक जीत दर्ज की। कुछ दिनों बाद वर्ष 2006 में बाबूलाल मरांडी ने भाजपा के साथ संसद की भी सदस्यता छोड़ दी।

फिर यहां उप चुनाव की नौबत आ गई। इस चुनाव में बाबूलाल मरांडी ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में एक बार फिर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। ढाई वर्ष बाद ही 2009 में हुए आम चुनाव में एक बार फिर बाबूलाल मरांडी ने झाविमो प्रत्याशी के रूप में अपनी तीसरी जीत दर्ज करते हुए हैट्रिक लगाई। इसके बाद 2014 में हुए आम चुनाव में बाबूलाल कोडरमा छोड़ दुमका से भाग्य आजमाने चले गए।

यह सीट उन्होंने तब झाविमो में शामिल हुए प्रणव वर्मा के लिए छोड़ी थी, लेकिन इस बार दुविधा में उनके लिए माया मिली न राम वाली स्थिति हो गई। प्रणव वर्मा तो चुनाव हारे ही दुमका में बाबूलाल मरांडी भी चुनाव हार गए। इस चुनाव में कोडरमा से भाजपा प्रत्याशी के रूप में डॉ. र¨वद्र राय भाकपा माले के राजकुमार यादव को शिकस्त देते हुए अपनी जीत दर्ज की।

इस बार पुन: बाबूलाल मरांडी ने कोडरमा से चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है तो मुकाबला दिलचस्प होगा। हालांकि भाजपा उम्मीदवार की अभी घोषणा नहीं हुई है। भाजपा के र¨वद्र राय यहां से सी¨टग सांसद हैं। यदि पार्टी ने चेहरा बदला तो मुकाबले की नई तस्वीर उभरेगी।

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