अनूप कुमार, कोडरमा: फलों का राजा आम का सीजन अभी अंतिम दौर में है। बंगाल और बिहार से दुधिया मालदा आम की आवक अब धीरे-धीरे कम हो रही है। लेकिन झुमरीतिलैया व आसपास के बाजार में डोमचांच के मसनोडीह का आम धूम मचा रहा है। यहां के आम की खासियत है कि यहां का आम सबसे अंत में आता है। यहां मालदा, हिमसागर, तोतापरी, गुलाब खास, कृष्णभोग जैसे आम जून के दूसरे पखवाड़े से तैयार होते हैं, जो पूरे जुलाई तक चलता है। मसनोडीह का जमींदार रहे स्व. धर्मनारायण सिंह के परिवार का यहां चार बड़ा आम का बगीचा है, जिसमें आम के करीब 500 पेड़ हैं। यह आम बागान कोडरमा व आसपास के जिले का सबसे बड़ा बागान है। इस परिवार के दीपक सिंह, त्रिपुरारी सिंह कहते हैं बागान को उनके पूर्वजों (परदादा) तुफानी सिंह, झरी सिंह, प्रयाग सिंह आदि के समय करीब 60 साल पहले लगाई गई थी। तब कोलकाता के प्रसिद्ध ग्लोब नर्सरी ने आम का पौधा लाकर यहां लगाया गया था। सभी आम के पेड़ काफी पुराने और विशाल आकार ले चुके हैं। परिवार की चौथी-पांचवी पीढ़ी के लोग अभी भी इस बागान के आम खा रहे हैं। इतना ही नहीं, प्रतिवर्ष बागान की नीलामी के लिए

लाखों की बोली लगती है, जिसे स्थानीय लोग ही बोली लगाकर लेते हैं। पेड़ लगाने के यह फायदे है कि कई दशक से बगीचे का आम फल देता आ रहा है। साथ ही पूरे इलाके में हरियाली भी फैला रहा है। बागान के ठेकेदार प्रकाश कुमार, भोला आदि ने बताया कि यहां का आम सीजन के अंत में तैयार होता है। इस वजह रेट सही मिल जाता है। वर्तमान यहां से व्यापारी 40 रुपये प्रतिकिलो की दर से आम ले जाते हैं। जब आम में मंजर आता है तभी बगीचे की बोली लगाकर लेते हैं। इसके बाद बगीचे की देखभाल, दवा आदि उन्हें ही करनी पड़ती है।

:::::::: क्या कहते हैं विशेषज्ञ::::::::

बागान काफी पुराना है। यहां के पेड़ बीज द्वारा तैयार प्रतीत होता है। बीज द्वारा तैयार पेड़ फल देरी से देते हैं। वहीं आकार में काफी विशाल होते हैं। वहीं कलमी द्वारा तैयार पेड़ कम ऊंचाई के और सीजन में जल्दी फल देनेवाले होते हैं।

भुपेंद्र सिंह, बागवानी विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्र, जयनगर।

Edited By: Jagran