जयनगर (कोडरमा), [रणजीत कुमार भारती]। चाहे लोगों को बाजार करना हो या फिर बच्चों को स्कूल जाना हो। किसी भी काम के लिए हीरोडीह समेत आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों को रोज-रोज रेल ट्रैक पार करना होता है। रेल ट्रैक पार करना अब यहां के लोगों की नियति बन गई है। लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर रेल ट्रैक को पार करना होता है। इस बार लोकसभा के चुनाव में यह एक बड़ा स्थानीय मुद्दा बन रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि जनप्रतिनिधि इस समस्या को लेकर गंभीर नहीं हैं। बता दें कि हीरोडीह, रेभनाडीह, बाराडीह, कुषाहन, महेशमराय, सुगासांख, करियावां समेत दर्जनों गांवों के लोग प्रतिदिन रेल ट्रैक पार कर हीरोडीह बाजार आते-जाते हैं, जबकि रेभनाडीह, तेतरियाडीह, गेडेनगर, कंद्रपडीह, हीरोडीह बाजार, चिग्लावर आदि के बच्चे भी प्रतिदिन जान जोखिम में डालकर स्कूल आते-जाते हैं।

इससे हमेशा खतरे की स्थिति बनी रहती है। जयनगर और बरक_ा प्रखंड के कई गांवों के लोग प्रतिदिन बैंक कार्य के लिए तिलैया या कोडरमा जाने के लिए हीरोडीह पहुंचते हैं। यहां उन्हें रेल ट्रैक पार करना ही होता है। कई बार तो कोडरमा थर्मल पावर केंद्र में कोयला लेकर जानेवाली रैक घंटों ट्रैक पर खड़ी रहती है। इससे आने-जाने में लोगों को और भी परेशानी होती है। रेल ट्रैक पार करने में सबसे अधिक परेशानी छोटे-छोटे स्कूली बच्चों को होती है। ठीक यही स्थिति सरमाटांड रेलवे स्टेशन की भी है।

यहां भी लोगों को भी रेल ट्रैक पार कर ही आना-जाना होता है। बच्चों को भी रेल ट्रैक पार कर स्कूल आना-जाना पड़ता है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने कई बार यहां फुट ओवरब्रिज बनाने की मांग की, परंतु रेल प्रशासन पर कोई असर नहीं हुआ। स्थानीय ग्रामीणों के साथ विभिन्न राजनीतिक दलों ने हीरोडीह तथा सरमाटांड़ रेलवे स्टेशन पर धरना-प्रदर्शन किया, परंतु रेल प्रशासन ने इस ओर कोई कदम नहीं उठाया।

Posted By: Sujeet Kumar Suman

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