जागरण संवाददाता, कोडरमा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुनामी में इसबार कोडरमा लोकसभा क्षेत्र का सभी पुराना रिकार्ड ध्वस्त हो गया। इस क्रम में भाजपा और अन्नपूर्णा देवी ने कई नए रिकार्ड बनाए। अन्नपूर्णा ने निकटतम प्रतिद्वंद्वी झाविमो के बाबूलाल मरांडी को 4,56,377 मतों के विशाल अंतर से हरा कोडरमा की पहली महिला सांसद बनने का गौरव हासिल किया। इसके साथ ही अन्नपूर्णा ने कोडरमा संसदीय क्षेत्र से संसद में प्रतिनिधित्व के मामले में गिरिडीह के नेताओं का वर्चस्व भी तोड़ दिया। इससे पूर्व यहां से जितने भी सांसद हुए सभी गिरिडीह जिला के थे। इतना ही नहीं, झारखंड में सर्वाधिक मतों के अंतर से जितने का रिकार्ड भी अन्नपूर्णा ने अपने नाम कर लिया। कोडरमा के निवर्तमान सांसद डॉ. रवींद्र राय का टिकट कटने से उपजे कई अंर्तविरोधों के बीच चुनाव से ठीक पहले राजद छोड़ भाजपा में शामिल हुई अन्नपूर्णा देवी न केवल भाजपा के इस गढ़ को बचाने में कामयाब रहीं, बल्कि पूर्व के सारे रिकार्ड भी तोड़ दिए। यहां इनका मुकाबला पूर्व मुख्यमंत्री व कोडरमा से तीन बार सांसद रहे महागठबंधन के बड़े नेता बाबूलाल मरांडी से था। लेकिन भगवा सुनामी में जहां एक ओर बाबूलाल मरांडी ढेर हो गए वहीं पिछले चुनाव में 2.65 लाख वोट लाकर फ‌र्स्ट रनरअप रहे भाकपा माले के राजकुमार यादव का लाल पताका तिनके की तरह उड़ गया। इसबार वे 60 हजार वोटों के अंदर सिमट गए। बाबूलाल तो किसी तरह अपनी जमानत बचा पाए, लेकिन राजकुमार यादव यहां जमानत बचाने से कोसों दूर रह गए। बाबूलाल और राजकुमार यादव जैसे दो बड़े सुरमाओं की मौजूदगी के कारण इस सीट पर सबकी नजर थी। भाजपा प्रदेश नेतृत्व व स्वयं मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इसे चुनौती के रूप में लिया। मुख्यमंत्री ने यहां करीब आधा दर्जन चुनावी सभाएं की और प्रमुख नेताओं से सीधा संपर्क स्थापित कर डे-टू-डे की मॉनिटरिग करते रहे। कोडरमा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ-साथ भाजपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित साह की चुनावी सभा का कार्यक्रम तय किया। हालांकि फणी तूफान के कारण अंतिम समय में अमित शाह का कार्यक्रम रद हो गया था। बहरहाल, कोडरमा की जीत जहां भाजपा के लिए बड़ी जीत मानी जा रही है, वहीं अन्नपूर्णा देवी के लिए यह राजनीति में नवजीवन की तरह है। वर्ष 1998 में अपने पति एकीकृत बिहार की राबड़ी देवी सरकार में मंत्री रहे स्व. रमेश प्रसाद यादव की असामयिक निधन के बाद घर की देहरी लांघकर राजनीति में आयीं। अन्नपूर्णा देवी वर्ष 1998 का विधानसभा उपचुनाव, 2000, 2005 और 2009 का विधानसभा चुनाव लगतार कोडरमा विधानसभा क्षेत्र से जीतती रहीं। 2013 में हेमंत सोरेन की सरकार में वो मंत्री भी बनीं। इसके बाद 2014 में उन्हें पहली बार भाजपा प्रत्याशी नीरा यादव से हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में प्रदेश में राजद का सूपड़ा पूरी तरह साफ हो गया था। इसके कुछ दिनों बाद लालू प्रसाद ने उन्हें राजद के प्रदेश अध्यक्ष की बागडोर सौंपी। लेकिन इसी वर्ष अप्रैल माह में अचानक हुए राजनीतिक उलटफेर के बीच वो सभी को चौंकाते हुए राजद छोड़ भाजपा में शामिल हो गई। माना जा रहा है कोडरमा सांसद रवींद्र राय को बेटिकट करने के लिए ही प्रदेश नेतृत्व ने अन्नपूर्णा देवी को पार्टी में शामिल किया। इसके कुछ दिनों बाद ही उनकी उम्मीदवारी की घोषणा की गई। इस तरह अन्नपूर्णा देवी के लिए राजनीतिक बदलाव का यह जोखिम भरा कदम सुखद रहा। यह राजनीति में उनके लिए पुनर्जन्म जैसा रहा, क्योंकि प्रदेश में राजद का अस्तित्व लगभग समापत हो चुका है। वहीं राजद के गढ़ बिहार में भी इसबार राजद का सूपड़ा साफ हो गया है।

:::: अन्नपूर्णा की जीत के दस बड़े कारण :

1. कोडरमा लोकसभा क्षेत्र में भाजपा के मजबूत जनाधार के साथ-साथ ब्रांड मोदी लहर में उन्हें पार्टी का उम्मीदवार बनाया जाना।

2. चुनाव के समय घोर विरोधी दल से आने से बाद भी पार्टी कार्यकर्ताओं में उनके नाम पर किसी तरह का विरोध नहीं होना।

3. कोडरमा जिले के कोडरमा एवं बरकट्ठा विधानसभा क्षेत्र में अन्नपूर्णा के साथ-साथ भाजपा का मजबूत जनाधार होने से वोटरों का रुझान बढ़ना।

4. पहली बार भाजपा जैसे बड़े दल के द्वारा कोडरमा जिला के किसी नेता का लोकसभा क्षेत्र का उम्मीदवार बनाए जाने पर कोडरमा व बरकट्ठा से इन्हें जबरदस्त लीड मिली।

5. भाजपा के मजबूत संगठन के साथ-साथ इसकी आनुषांगिक संगठन आरएसएस, विहिप, बजरंग दल, भारत विकास परिषद जैसे संगठनों का बढ़-चढ़कर सहयोग मिलना।

6. लोकसभा क्षेत्र के जमुआ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा का होना।

7. अन्नपूर्णा देवी के स्वजातीय यादव मतों की क्षेत्र में बहुलता और भाजपा प्रत्याशी बनने के बाद इनके पक्ष में एकतरफा मत पड़ने के साथ-साथ भाजपा के परंपरागत वोटों में किसी तरह का बिखराव नहीं होना।

8. लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत छह में से पांच विधानसभा क्षेत्र में भाजपा का विधायक होने से सांगठनिक ताकत में इजाफा।

9. अपनी व्यवहार कुशलता, सादगी और सौम्य स्वभाव के कारण सभी वर्गों की बीच लोकप्रियता व उनके लिए स्वीकार्य होना।

10. अन्नपूर्णा देवी के राजद छोड़ने के बाद भी उनके खिलाफ न तो लालू-राबड़ी परिवार के किसी सदस्य ने कोई बयान दिया और ना ही यहां उनके खिलाफ कोई चुनावी सभा की।

Posted By: Jagran

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