जागरण संवाददाता, खूंटी : नगर पंचायत अंतर्गत वार्ड नंबर सात स्थित सड़क का पक्कीकरण डेढ़ वर्ष पूर्व ही किया गया था, पीसीसी सड़क निर्माण के कुछ माह बाद ही इस सड़क को पाइप लाइन बिछाने के नाम पर खोद दिया गया। अब बारिश के मौसम में यहां पैदल गुजरना भी मुश्किल है। नगर पंचायत क्षेत्र में हर गली-मोहल्लों में ऐसी कई सड़क मिलेंगी, जो पक्की होने के बावजूद कीचड़ से सनी हुई है। लगभग 60 करोड़ की लागत वाले महत्वाकांक्षी शहरी जलापूर्ति योजना के तहत शहर के विभिन्न क्षेत्रों में बनने वाले तीन जलमीनार सहित योजना के अन्य महत्वपूर्ण कार्य ढाई वर्ष बाद भी अभी प्रारंभिक चरण में ही है। लेकिन शहर के लगभग सभी गली-मोहल्लों की पक्की पीसीसी सड़क को पाइप लाइन बिछाने के नाम पर खोदकर अस्त-व्यस्त कर दिया गया है। इस स्थिति में बारिश के मौसम में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। महत्वाकांक्षी शहरी जलापूर्ति योजना के संवेदक कंपनी द्वारा फिल्ट्रेशन प्लांट, जलमीनार सहित अन्य महत्वपूर्ण कामों को जहां अत्यंत धीमी गति से किया जा रहा है, वहीं प्रारंभिक चरण में ही पाइपलाइन बिछाने का काम कर शहर की पक्की सड़कों को अस्त-व्यस्त कर दिया गया। संवेदक कंपनी का कहना है कि योजना में खोदे गई सड़क को मरम्मत करने का भी प्रावधान है, लेकिन पाइप लाइन में पानी आपूर्ति का टेस्ट होने के बाद ही खोदी गई सड़क की मरम्मत की जाएगी। ऐसे में यहां प्रश्न उठता है कि योजना अंतर्गत जलमीनार सहित अन्य महत्वपूर्ण कार्य अभी प्रारंभिक चरण में ही है तब क्या वर्षों तक यह सड़कें ऐसे ही अस्त-व्यस्त रहेंगी। लोगों का कहना है कि योजना के सभी महत्वपूर्ण काम पूरा होने के बाद ही पाइप लाइन बिछाने का काम करना था। लेकिन संबंधित अधिकारियों की उदासीनता के कारण संवेदक कंपनी ने प्रारंभ में ही पाइपलाइन बिछाने का काम कर शहरवासियों के समक्ष परेशानी खड़ी कर दी है। इसका खामियाजा बारिश के दिनों में आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

उल्लेखनीय है कि खूंटी नगर पंचायत क्षेत्र में आने वाले 40 वर्ष बाद तक बढ़ने वाली जनसंख्या को पर्याप्त पानी मिल सके इसे ध्यान में रख तत्कालीन एनडीए सरकार ने विश्व बैंक संपोषित यह योजना शुरू की थी। योजना का शिलान्यास तत्कालीन नगर विकास मंत्री सीपी सिंह ने वर्ष 2018 में बड़े तामझाम से किया था। जुडको की देखरेख में चल रहे इस महत्वाकांक्षी योजना का काम तमिलनाडु के श्रीराम ईपीसी नामक कंपनी को सौंपा गया है। दो वर्षों में योजना को पूर्ण करना था, लेकिन ढाई वर्ष बीत जाने के बाद भी योजना में अब तक महज 25 प्रतिशत ही काम हो सका है। योजना में एक नया फिल्ट्रेशन प्लांट, तीन जलमीनार सहित विभिन्न क्षेत्रों में पाइप लाइन बिछाने का काम करना है।

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