जागरण संवाददाता, खूंटी : जिला प्रसाशन और बेटर व‌र्ल्ड फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में चलाए जा रहे नुट्रिशन ऑन व्हील कार्यक्रम में समुदाय आधारित कुपोषित बच्चों की देखभाल की जा रही है। पोषण शिविर की शुरुआत तिरला पंचायत भवन से एक सितंबर को की गई थी, जो अब भंडरा, मुरही, सिलादोन आदि पंचायत में पूरी की जा चुकी है। चारों पंचायतों के शिविर में सभी कुपोषित एवं अतिकुपोषित बच्चों को उचित गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया गया है, हर पोषण शिविर में कुपोषित बच्चों की माताओं को लोहे की कड़ाही दी गई और बताया गया कि लोहे की कड़ाही में खाना बनाने से आवश्यक लौह तत्व परिवार के सदस्यों को प्राप्त होंगे। पहले दो साल में प्रत्येक बच्चे का मानसिक विकास लगभग 75 प्रतिशत हो जाना चाहिए लेकिन छह महीने बाद बच्चे को उचित विविधता एवं मात्रा में भोजन न मिलने के कारण बच्चे का मानसिक विकास प्रभावित होता है और वो कुपोषित हो जाते हैं, इसलिए जरुरी है की छह महीने होते ही बच्चे के लिए ऊपरी आहार सुनिश्चित किया जाए, ये जरूरी जानकारी एवं खान-पान से जुड़ी व्यवहार परिवर्तनो की आदते 15 दिनों के दौरान बच्चों की माताओं को सिखाई जा रही है। तिरला, भंडरा, मुरही, सिलादोन पंचायत के प्रत्येक आंगनवाड़ी केंद्र अंतर्गत आने वाले शून्य से पांच साल तक के बच्चों का सर्वे एवं उनके वजन व लंबाई का माप लेकर कुपोषित बच्चो की पहचान की गई है।

37 गर्भवती महिलाओं का किया गया हीमोग्लोबिन टेस्ट

भंडरा पंचायत में शनिवार को 37 गर्भवती महिलाओं का हीमोग्लोबिन टेस्ट किया गया। पोषण शिविर में आ रहे कुपोषित बच्चों की मां की भी एनीमिया जांच की गई, जिसमें से चार महिलाओं का हीमोग्लोबिन सात ग्राम से कम पाया गया। पोषण शिविर में किशोरी बैठक, रेसेपी प्रतियोगिता, मां बैठक, महिला किसान बैठक, अन्नप्राशन दिवस, सुपोषण दिवस, सास-बहु सम्मेलन, हेल्दी बेबी शो, गोद भराई जैसी गतिविधियां समय-समय पर करायी जा रही है। इसके साथ ही जो भी पौष्टिक व गुणवत्ता पूर्ण आहार बच्चों के लिए बनाए जा रहे है, उन्हें बच्चों की मां को भी सिखाया जा रहा है ताकि घर पर ही वो पंजीरी, मुरही प्रेमिक्स पाउडर, सब्जियां युक्त दलिया, चना दाल का मीठा हलवा जैसे खाद्य पदार्थ बना सकें।

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