खूंटी, दिवाकर श्रीवास्तव। पत्थलगड़ी और अफीम की खेती और उग्रवाद को लेकर बदनाम झारखंड के खूंटी जिले का एक अलग चेहरा भी है। इस के दुरुह इलाके में महिला सशक्तीकरण की दिशा में शानदार काम हो रहा है। देहरी के भीतर रहने वाली यहां की हजारों महिलाएं आत्मनिर्भरता के रास्ते पर हैं। आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं। अपनी जरूरतों के लिए इन्हें पुरुषों के सामने हाथ नहीं फैलाना पड़ रहा। सखी मंडल से जुड़कर प्रशिक्षण ले रही हैं और खेती, पशुपालन आदि का काम कर अपने जीवन में भी बुलंदी ला रही हैं। आधी आबादी को सशक्त करने के मोर्चे पर आरक्षण से लेकर तमाम तरह के उपाए सरकार कर रही है। ऐसे में खूंटी से निकल रही आवाज दूसरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

जेएसएलपीएस की पहल का असर सरकार ने महिलाओं को सखी मंडलों से जोड़कर उनके आर्थिक स्वावलंबन की यात्रा की शुरुआत की है। नतीजा है कि ग्रामीण विकास विभाग की संस्था जेएसएलपीएस (झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रोजेक्ट) द्वारा खूंटी जिले में 5800 सखी मंडलों का गठन द्वारा किया गया है। हर ग्रुप मे दस से बारह महिलाएं। जिले में करीब 77 हजार महिलाएं इन सखी मंडलों से जुड़ी हुई हैं। मिली रही वित्तीय मदद जिले में 3800 सखी मंडलों को 15 हजार रुपये की दर से 9.95 करोड़ रुपये एवं 1991 सखी मंडलों को 50 हजार की दर से 5.70 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई है। सरकार द्वारा मुहैया कराए गए इन पैसों से महिला मंडल की सदस्य विभिन्न तरह के प्रशिक्षण पाकर आत्मनिर्भर होकर विकास में अपनी भूमिका अदा कर रही हैं।

आजीविका मिशन से जुड़कर ये महिलाएं अब न केवल परिवार को आर्थिक मजबूती प्रदान कर रही हैं, बल्कि गतिविधियों में नवाचार लाकर समाज में इन्हीं परिस्थितियों से जूझ रहे महिलाओं के लिए आदर्श पेश कर रही हैं। खूंटी जिले का गुटजोरा गांव महिला सशक्तिकरण का नर्सरी बन चुका है। गांव में 27 सखी मंडल ग्रुप हैं। प्रत्येक ग्रुप में 10 से 12 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। यहां लगभग 20 सखी मंडलों को मिलाकर ग्राम संगठन बनाया गया है। साथ ही 40 का पीजी ग्रुप भी है। इस ग्रुप की महिलाएं फल एवं सब्जी उत्पादन करती हैं। साथ ही, स्थानीय बाजार में उसकी बिक्री भी करती हैं। जेएसएलपीएस द्वारा गांव में ही महिलाओं के लिए नर्सरी का निर्माण किया गया है, जहां पौधे तैयार कर महिलाएं अपने खेतों में लगाकर फल एवं सब्जी का उत्पादन करती हैं।

नर्सरी में केला, पपीता, टमाटर, मिर्चा, बैगन, करेला, लौकी, तरबूज एवं बींस के पौधे तैयार कर जैविक खेती कर महिलाएं सब्जी उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन रही हैं। कहती हैं सखी मंडल की सदस्य गुटजोरा गांव की प्रगतिशील किसान रेखा देवी के खेतों में टमाटर की फसल लहलहा रही है। जेएसएलपीएस द्वारा उनके खेतों में टपक सिंचाई की सुविधा मुहैया कराई गई है। रेखा देवी पूर्ण रूप से जैविक खेती कर आत्मनिर्भर बन रही हैं।

गुटजोरा गांव में चार लाभुकों को माइक्रो ड्रिप इरिगेशन की सुविधा दी गई है। रेखा देवी प्रगतिशील किसान के साथ-साथ आजीविका कृषक मित्र की भूमिका भी निभा रही हैं। उन्होंने बताया कि टपक विधि से सिंचाई करने पर पानी की बचत के साथ-साथ बेहतर उपज की भी प्राप्त हो रही है। वहीं बिरहू बड़का टोली की अनीता सांगा अपने घर में ही मशरूम उपजा कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। अनीता सांगा के साथ-साथ सात अन्य महिलाएं भी बिरहू में मशरूम का उत्पादन कर ही है तो कोई लेमन ग्रास और मोमबत्ती बना अपनी झोली में खुशियां भर रही हैं।

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