जागरण संवाददाता, जामताड़ा : महिलाओं और बच्चियों का सम्मान करना हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। कन्या भ्रूणहत्या करने वाले लोगों के विरुद्ध सरकार ने कठोर नियम बनाया है। इन नियमों का पालन कराना सबों की जवाबदेही है। बच्चियों के पैदा होने से पहले ही उनकी हत्या करने जैसे अपराध को अंजाम देने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। सोमवार को डीसी कार्यालय के सभागार में उपायुक्त गणेश कुमार पीसी एवं पीएनडीटी (पूर्व गर्भाधान और प्रसव पूर्व निदान तकनीक) एक्ट के तहत आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए उक्त बातें कही।

डीसी ने कहा कि पीसी एवं पीएनडीटी एक्ट को दृढ़ता से लागू करना है। इसके लिए पहल आरंभ करने व अल्ट्रासाउंड केंद्रों का निरीक्षण करने से संबंधित कानूनी जानकारियां दी गई। कहा कि लड़का-लड़कियों के लिग अनुपात में समानता लाने के लिए भी सभी स्तर पर प्रयास करें। इन प्रयासों में समाज की सक्रिय भागीदारी नितांत आवश्यक है। महिलाओं को समाज में आर्थिक,सामाजिक व अन्य क्षेत्रों में बराबरी की भागीदारी देने को सबको सकारात्मक सोच के साथ कार्य करने की आवश्यकता है। उपायुक्त ने कहा कि भ्रूण हत्या रोकने के क्षेत्र में सराहनीय कार्य करने वाले को पुरस्कृत करें। साथ ही सबों से अपने स्तर से भी लोगों को जागरूक करने की अपील की।

इस दौरान सिविल सर्जन डॉ. आशा एक्का ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना को गंभीरता से लागू करने की अपील की ताकि जिले में लिगानुपात में और अधिक सुधार किया जा सके। सिविल सर्जन ने कहा कि पूर्व गर्भाधान और प्रसव पूर्व निदान तकनीक 1994 भारत में कन्या भ्रूण हत्या और गिरते लिगानुपात को रोकने के लिए संसद की ओर से पारित एक संघीय कानून है। इस अधिनियम से प्रसव पूर्व लिग निर्धारण पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस एक्ट के तहत जन्म से पूर्व शिशु के लिग जांच पर पाबंदी है। ऐसे में अल्ट्रासाउंड या अल्ट्रासोनोग्राफी कराने वाली जोड़ी या करने वाले डाक्टर, लैब कर्मी को तीन से पांच साल सजा और 10 से 50 हजार जुर्माने की सजा का प्रावधान है।

मौके पर जिला शिक्षा पदाधिकारी बांके बिहारी सिंह, जिला भू अर्जन पदाधिकारी अंजना दास, डॉ. एसके मिश्रा, डीपीएम, जेएसएलपीएस, रेडक्रॉस सचिव राजेंद्र शर्मा सहित संबंधित पदाधिकारी जनप्रतिनिधि आदि उपस्थित थे।

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