मुरलीपहाड़ी (जामताड़ा) : धुरतीबेड़ा टोला के आदिवासी परिवारों को न तो राशन न किरोसिन मिल रहा है। सरकार के विकास व जरूरतमंद लोगों को कल्याणकारी योजना का लाभ देने का दावा नारायणपुर प्रखंड की देवलबाड़ी पंचायत के नेयाडीह में खोखला साबित हो रहा है। गांव के धुरतीबेड़ा टोला में 22 आदिवासी परिवार अत्यंत गरीब हैं। इन गरीब परिवारों का भरण-पोषण का जरिया मजदूरी है। ये मजदूर वर्ग के परिवार वर्ष 2015 से खाद्य सुरक्षा अधिनियम के दायरे में नहीं आ पाए हैं। इनमें से 18 परिवार को अब तक सरकार राशन कार्ड नहीं दे पाई है। लिहाजा इन 18 परिवारों को न तो सस्ते दर का खाद्यान ही मिल पा रहा है और न ही केरोसिन तेल ही। इस बाबत नीलमुनि बेसरा, सुकूमुनि मरांडी, सोनामनी चौड़े, सुकरमुनि हेंब्रम, पनसुखी किस्कू, नीलमुनि हेंब्रम, दुलाली बेसरा, विशेश्वर बेसरा, हेमलाल बेसरा ने बताया कि राशन कार्ड बनाने के लिए तीन वर्ष में छह से सात बार आवेदन दिए। दो बार जिला आपूर्ति कार्यालय व सात से आठ बार प्रखंड आपूर्ति कार्यालय का चक्कर काट चुके हैं। इतना कुछ करने के बाद भी चार वर्ष से सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि ऑफलाइन आवेदन से जब हमलोगों का कार्ड नहीं बना तो दो वर्ष पूर्व ऑनलाइन आवेदन किए। उस पर भी हमारे आवेदन पर आपूर्ति विभाग ने विचार तक नहीं किया।

बताया कि वे मिट्टी काटनेवाले व अन्य कार्यो को कर अपना पेट पालते हैं। मजदूर यदि सब दिन कार्यालय का ही चक्कर काटते रहेंगे तो अपने परिवार का भरण-पोषण कैसे करेंगे। ग्रामीणों ने कहा कि हम बेहद गरीब परिवार से हैं। हमें अनाज व पैसे के अभाव में कभी-कभी भूखे पेट भी रात गुजारना पड़ता है। आखिर इस महंगाई में हम और कर ही क्या सकते हैं। बताया कि पंचायत में ऐसे दर्जनों परिवारों का राशन कार्ड है जो संपन्न परिवार की श्रेणी में आते हैं। जिन्हें पक्के मकान, चार पहिया वाहन सहित अन्य सुविधा उपलब्ध है। उन्हें सस्ते दर की अनाज की आवश्यकता है। पर जिसे जरूरत है, उसे लाभ नहीं मिल रहा। ग्रामीणों ने प्रशासन से राशन कार्ड बनाने की मांग की है। इस बाबत प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी त्रिपुरारी राय ने बताया कि यदि ग्रामीणों ने ऑनलाइन आवेदन कर उसकी कॉपी यदि कार्यालय में जमा की है तो उनका राशन कार्ड जरूर बनेगा।

Posted By: Jagran

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