जामताड़ा : दिगंबर जैन मंदिर में 10 दिनों से चल रहे पर्युषण पर्व गुरुवार को उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म पालन के साथ समापन हो गया। उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म के साथ बासपूज्य भगवान का निर्वाण दिवस भी मनाया गया। वहीं दोपहर में भव्य शोभा यात्रा निकाली गई। गाजे-बाजे व जैन धर्म के पताखों के साथ भगवान को रथ पर सवार कर नगर भ्रमण कराया गया। इस दौरान सभी जैन धर्म के लोगों ने अपने घरों के सामने भगवान की आरती की। शोभायात्रा में महिलाएं पीले रंग की वस्त्र धारण कर कतारबद्ध होकर नगर भ्रमण में शामिल हुई। दिन भर मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान के पश्चात शाम को संध्या आरती की गई। देर शाम को महाराष्ट्र से पहुंचे बाल ब्रह्मचारी अजय भैया ने ब्रह्मचर्य धर्म पर प्रवचन दिया। प्रवचन के माध्यम से अजय भैया ने बताया कि कामसेवन का मन से, वचन से तथा परित्याग करके अपने आत्मा में रमना ब्रह्मचर्य है। संसार में समस्त वासनाओं में तीव्र व दुद्रवर्ष कामवासना है। इसी कारण अन्य इंद्रियों का दमन करना तो बहुत सरल है कितु कामवासना की साधन भूत काम इंद्रिया को वश में करना बहुत कठिन है। छोटे-छोटे जीव जंतुओं से लेकर बड़े से बड़े जीव तक में विषयवासना स्वाभाविक रूप से पाई गई है। कामातुर जीव का मन अपने वश में नहीं रहता। उसकी विवेकशक्ति नष्ट भ्रष्ट हो जाती है। पशु तो कामवासना के शिकार होकर माता, बहन, पुत्र, स्त्री आदि का भेदभाव करते ही नहीं। सभी को समान समझ कर सबसे अपनी कामवासना तृप्त करते रहते है। इसी कारण उसे पशु कहते हैं परंतु कामातुर मनुष्य भी कभी-कभी पशु सा बन जाते है। इस कारण कामदेव पर विजय प्राप्त करके ब्रह्मचर्य व्रत धारण करना बहुत कठिन है। इस मौके पर नगर पर्षद अध्यक्ष कमल गुप्ता, जैन समाज के मंत्री अनिल जैन, अशोक जैन, विनय जैन, संजय जैन, बबलू जैन, संयम जैन, तीर्थ जैन, अजीत जैन, स्वरूप जैन, ममता जैन, संगीता जैन, कल्पना जैन, रीता जैन, शंकुतला जैन, नीता जैन, मधु जैन, इंदिरा जैन, मोना जैन आदि मौजूद थे।

Posted By: Jagran

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