जामताड़ा : देश भर के बैंकखाता धारकों की राशि उड़ाकर जामताड़ा के विभिन्न बैंकों में उसे जमा करने, कमिशन पर साइबर अपराधियों को बैंक खाता उपलब्ध करानेवाले जामताड़ा बीच शहर में चिह्नित हैदरअली, उसकी मां आसमा व रिश्तेदार सरफराज की तलाश में साइबर थाना की पुलिस शनिवार को शहर से जामताड़ा तक उनकी टोह ली पर सफलता हाथ नहीं लगी। जामताड़ा व यहां से बाहर उनके रिश्तेदारों के आवासीय ठिकानों को भी पुलिस चिह्नित कर रही है ताकि देर-सबेर छापेमारी कर उन्हें गिरफ्त में लिया जा सके। इस बीच हैदरअली के घर शुक्रवार को हुई छापेमारी के बाद से उसका महिला कॉलेज रोड इलाके में स्थित लिबास टेलर भी बंद है। रविवार को भी दुकान का शटर नहीं उठा। वहीं पुलिस तारकनाथ नाग के अलावा तीनों के बंधन, एक्सिस व एसबीआइ के बैंक खातों को पुलिस फ्रिज कर दी है।

सनद रहे कि डीएसपी सुमित कुमार की अगुवाई में साइबर थाना प्रभारी सह इंस्पेक्टर सुनील चौधरी, इंस्पेक्टर चित्तरंजन मिश्र, इस्पेक्टर संजीव कुमार आदि ने पहले कोर्ट रोड दुर्गामंदिर के सामने नाग के आवास में छापेमारी की। वहां से नाग को गिरफ्तार किया। साथ में मोबाइल, बैंक खाता, एटीएम जब्त किया गया। उसके बाद महिला कॉलेज के समक्ष हैदरअली के आवास में छापेमारी की गई। वहां हैदरअली और उसकी मां आसमा नहीं मिली। घर से नई नेक्शन कार, डेढ़ दर्जन विभिन्न बैंकों का खाता, एटीएम, आधार कार्ड आदि जब्त किया गया। अली के जब्त खातों की जांच में 35 लाख का संदिग्ध ट्रांजेक्शन पुलिस को पहले दिन ही मिला था। संदिग्ध लेन-देन की रिपोर्ट आरबीआइ से मिलने के बाद एसपी अंशुमान कुमार के निर्देश पर हुई छापेमारी में साइबर थाना की पुलिस को इस नए रैकेट का पता चला था।

---चार साल से ठगी के रुपये हो रहे थे जमा : इन दो दिनों के अनुसंधान में पुलिस नाग व अली समेत उसके रिश्तेदारों के बैंक खातों को फ्रिज कर दिया गया है। इनके खातों में लगभग चौदह लाख रुपये जमा है। इनमें अधिकांश राशि विभिन्न राज्यों के खाताधारकों की उड़ाकर उसे जमा करने से जुड़ी हैं। जांच में नाग के खातों में भी लाख रुपये से अधिक का संदिग्ध लेन-देन हाल के दिनों में मिला है।

---स्थानीय अपराधी दूसरे राज्यों में खोल रहे खाता : साइबर अपराध में पुलिस की गिरफ्त में फंसने की वजह से स्थानीय साइबर अपराधियों को अब दूसरे राज्यों में किराए व कमीशन पर बैंक खाता मिलने में मुश्किलें हो रही हैं। अपराधियों को इन खातों की जरूरत ऑनलाइन ठगी से उड़ाई गई राशि को जमा करने में पड़ती है। फिर बाद में उन खातों से एटीएम कार्ड के जरिए ठगी की राशि निकाली जाती है। इसका खुलासा शनिवार को विद्यासागर थाना क्षेत्र में छापेमारी करने पहुंची मुंगेर जिला की पुलिस ने किया। दरअसल गुरुवार की रात को बिहार के ईस्ट कॉलोनी मुंगेर थाना के प्रभारी सह इंस्पेक्टर नरेंद्र कुमार ताराबहाल गांव में छापेमारी की थी। ताराबहाल गांव के आवास मियां के पुत्र मुबारक मियां व देवडीह निवासी मुमताज मियां का पुत्र लाल मोहम्मद को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के मुताबिक लाल मोहम्मद सूरत काम करने गया था। वहां उसने बैंक में खाता खुलवाया और वापस करमाटांड़ आ गया। करमाटांड़ अपने घर आने के बाद सूरत के खाते में साइबर ठगी का पैसा ट्रांसफर कर रहा था। सूरत के खाते में अवैध लेन-देन के आधार पर जांच करते हुए पुलिस यहां तक पहुंची थी। मुंगेर के व्यक्ति का पैसा उड़ाकर उसने अपने खाता में डाला था। दोनों मियां की गिरफ्तारी से ही पुलिस को पता चला कि जामताड़ा के साइबर अपराधी अब सुदूर दूसरे राज्यों में जाकर अपना बैंक खाता खोलवाते हैं ताकि उसका ऑनलाइन ठगी की राशि जमा करवाने में उपयोग किया जा सके।

---वर्जन : हैददअली, आसमा व सरफराज की तलाश में पुलिस छापेमारी कर रही है। जिले के बाहर के ठिकानों का भी पता किया जा रहा है। उनके बंधन, एक्सिस व एसबीआइ से जुड़े बैंक खातों को फ्रिज कर दिया गया है। दस लाख से अधिक की राशि खातों में जांच के दौरान मिली है। अनुसंधान में पता किया जा रहा है कि तारकनाथ नाग के अलावा उक्त तीनों के खातों में किन-किन राज्यों के खाताधारकों की राशि उड़ाकर जमा किया गया है। हैदर समेत तीनों दूसरे साइबर अपराधियों की भी राशि कमीशन पर अपने खाते में मंगवाते थे। फिर एटीएम कार्ड से राशि निकालकर अपने हिस्से की राशि रख कर शेष संबंधित अपराधियों को सिपुर्द कर देते हैं। ऐसे अपराधियों को भी चिह्नित किया जा रहा है।

सुमित कुमार, डीएसपी, साइबर पुलिस।

Posted By: Jagran

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