जामताड़ा : एनपीआर-एनआरसी व सीएए से सिर्फ मुसलमान ही नहीं प्रभावित होंगे बल्कि एससी, एसटी, ओबीसी, दलित, घुमंतू, पहाड़िया, बंजारा एवं बाढ़ तथा अकाल से प्रभावित व्यक्ति भी प्रभावित होंगे। उक्त बातें संविधान बचाओ आंदोलन के संयोजक गाजी रहमतुल्लाह रहमत ने कही। उन्होंने कहा कि एनपीआर और एनआरसी आपस में जुड़ा हुआ है। एनपीआर हो जाने के बाद एनआरसी के लिए अलग से कोई गणना नहीं करनी पड़ेगी और न ही उसके लिए अलग से कोई सर्वे करना पड़ेगा। एनआरसी के लिए जितनी जानकारियां चाहिए एनपीआर से पूर्ण हो जाएगी। उन्होंने लोगों को आगाह किया कि मोदी सरकार का असली इरादा एनपीआर के लिए एक अलग फार्म का भरवाना और उसे एनआरसी के लिए इस्तेमाल करना है। उन्होंने कहा कि देश में ज्यादातर लोग ऐसे हैं जो शिक्षा एवं रोजगार के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान  को जाते रहते हैं। ऐसे में कोई सरकार यह कैसे अपेक्षा कर सकती है कि इस तरह के लोग अपना रिकॉर्ड संभाल कर रखेंगे। कुछ बाढ़ पीड़ित इलाके के लोग जान बचाकर दूसरे राज्यों में शरण लेते हैं उनके पास किसी भी तरह के कागजात नहीं होते हैं उनका क्या हाल होगा ? कुछ लोग घुमंतू जीवन जीते हैं जिनका न कोई घर होता है ना कोई जगह जमीन उनका क्या हाल होगा। ऐसे लोगों के पास एनपीआर के लिए जानकारी देने के कुछ भी प्रमाण नहीं रहेंगे तो क्या वह हमारे देश के नागरिक नहीं हैं। एनपीआर कर्मी लोगों द्वारा दिए गए जवाबों की जांच पड़ताल करेंगे। उन्होंने कहा कि अगर एनपीआर कर्मियों को यह लगा कि कुछ जवाब संतोषजनक नहीं है या प्रासंगिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं है तो ऐसे व्यक्तियों को नागरिकता कानून के मुताबिक संदेहास्पद व्यक्ति करार दिया जाएगा, और उन पर दबाव बनाया जाएगा कि वे समुचित दस्तावेज पेश करें। जो लोग ऐसे दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा पाएंगे उन्हें अयोग्य नागरिक घोषित कर दिया जाएगा कुछ महीने पहले असम में यही हुआ है।

Posted By: Jagran

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