संवाद सहयोगी, जामताड़ा : दो दिसंबर से यक्ष्मा नियंत्रण विभाग की ओर से जिले में चल रहे रोगी खोज अभियान गति पकड़ने लगी है। 42914 लोगों की प्रारंभिक जांच की गई। प्रारंभिक जांच में संभावित लक्षण पाए जाने पर 176 लोगों का बलगम जांच के लिए लिया गया। 176 में 51 की जांच प्रक्रिया पूरी की गई जिसमें छह लोग टीबी के मरीज पाए गए हैं। अब भी गांव-गांव संभावित मरीजों से नमूने के तौर पर बलगम लिया जा रहा है। इसकी जांच भी प्रखंड स्तर पर शुरू हो गई है। खोज अभियान 15 दिसंबर तक चलेगा। अब प्रखंड व जिला स्तरीय चिकित्सा पदाधिकारी व स्वास्थ्य कर्मी घर घर भ्रमण करने वाले कर्मियों के काम का मूल्यांकन करेंगे और जरूरत के अनुरूप उन्हें सहयोग प्रदान करेंगे।

---सीएस ने सर्वेक्षण का जायजा लिया : इस बाबत अभियान के आठवें दिन सोमवार को सिविल सर्जन डॉ. आशा एक्का व जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. डीके अखौरी ने विभिन्न गांवों में भ्रमण कर चल रहे इंद्रधनुष व यक्ष्मा रोगी सर्वेक्षण कार्य का जायजा लिया। मौके पर सर्वेक्षण कार्य में जुटी सहिया, एएनएम व साथी सहिया को सर्वेक्षण कार्य करने के तरीके बताए। अभियान को सफल बनाने में विभाग ने 180 टीम बनाई है। प्रत्येक टीम में सहिया, सामुदायिक स्वस्थ्य कार्यकर्ता, बीटीटी शामिल है। टीम के सदस्य अपने पोषक क्षेत्र में घर घर भ्रमण कर संभावित मरीज की खोज कर रहे हैं। लोगों को यक्ष्मा बीमारी के लक्षण व रोकथाम की जानकारी दे जा रही है।

---42914 लोगों की प्रारंभिक जांच की गई : अब तक जिले के 180 टीम के कर्मियों ने 42914 संभावित मरीजों की लक्षणों के बारे में जानकारी ली। जिसमें 176 संभावित मरीज मिले। सर्वेक्षण कर्मियों ने इन 176 लोगों का बलगम का नमूना प्रखंड स्तरीय जांच केंद्र में जमा कर दिया है। जांच केंद्र में अब तक 51 नमूने की जांच की जा चुकी है। इसमें छह मरीज पॉजिटिव पाए गए है। शेष नमूना जांच का काम चल रहा है। रोगी खोज टीम सदस्यों के दैनिक सर्वेक्षण कार्य के मूल्यांकन के लिए जिले में 33 पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। आवंटित क्षेत्र में पर्यवेक्षक निरीक्षण कर रहे हैं।

-- क्या है बीमारी : टीबी अर्थात क्षय-रोग एक गंभीर बीमारी है। यह एक संक्रामक-रोग है, जो एक मरीज के खांसने व थूकने से दूसरे लोगों में फैलता है। टीबी रोगियों की जल्द पहचान करके उनका इलाज शुरू करके ही इसको रोका जा सकता है। जिले के सभी छह प्रखंड में बलगम जांच केंद्र संचालित है। संभावित मरीज की खोज कर उसके बलगम को जांच घर तक पहुंचाने के लिए सहिया या अन्य प्रेरक को प्रोत्साहन राशि यक्ष्मा विभाग देता है।

जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. डीके अखौरी ने बताया कि टीबी रोगी खोज अभियान का मुख्य उद्देश्य 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाना है। इस वर्ष जिले में पहले व दूसरे चरण में अभियान चलाया जा चुका है। वर्तमान समय में तीसरे चरण का अभियान चल रहा है। अभियान को सफल बनाने के लिए प्रखंड व जिला स्तरीय पदाधिकारी को निरीक्षण पदाधिकारी का दायित्व दिया गया है। वहीं पर्यवेक्षक भी कर्मियों का सहयोग कर रहे हैं।

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस