मिहिजाम (जामताड़ा) : वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण फैलने के दौरान पिछले 30 दिनों से पश्चिम बंगाल के मुर्शीदाबाद के 34 लोगों (मजदूर) को उनके घर भेज दिया गया। शनिवार को चिकित्सा प्रभारी डॉ. सुनील कुमार किस्कू, थाना प्रभारी सुरेश प्रसाद, नगर प्रबंधक क्रमश: राजेश प्रसाद व मनीष तिवारी व क्वारंटाइन सेंटर के सुपरवाइजर बबलू शर्मा की उपस्थिति में सभी 34 लोगों की शारीरिक जांच किया गया। सभी लोगों को स्वस्थ पाने के उपरांत एक बड़ी बस से झारखंड के पाकुड़ सीमा पर सभी को छोड़ दिया जाएगा। सूत्रों ने बताया कि पाकुड़ सीमा से मुर्शीदाबाद इलाका सटा हुआ है सभी सीमा पर बस से उतर कर पैदल अपने-अपने घर चले जाएंगे। इस दौरान नगर पर्षद अध्यक्ष कमल गुप्ता व उपाध्यक्ष शांती देवी आदि लोग मौजूद थे। गौरतलब हो कि लॉकडाउन व सीमा सील रहने के बावजूद तीन अप्रैल की रात लगभग साढ़े आठ बजे बिहार राज्य के लक्खीसराय स्थित कोली गांव से 34 मजदूर पश्चिम बंगाल के मुर्शीदाबाद जाने के क्रम में कानगोई चेक पोस्ट पर रोक दिए गए था तथा सभी मजदूरों को स्थानीय भारत माता मंडप (डाक बंगला) में क्वारंटाईन सेंटर में रखा गया था। सभी मजदूर कोली गांव में मजदूरी का कार्य करते थे। जब से दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज का मामला आया तभी से गांव के लोगों ने उन सभी मजदूरों को कोली से निकल जाने को कहा। मजदूरों ने बताया कि दो अप्रैल को किसी तरह प्रशासन ने एक पिकअप वाहन का इंतजाम कर उससे बिहार झारखंड सीमा पर लाकर छोड़ दिया उसके बाद पुलिस ने रात भर रखा और तीन अप्रैल को एक पिकअप वाहन से बंगाल जाने का परमिशन दिया। झारखंड बंगाल सीमा कानगोई पहुंचे तो पुलिस ने फिर रोक लिया और यहां लेकर आ गए।

Posted By: Jagran

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