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ग्लोबल मार्केट में बिकेगा दलमा का महुआ-शहद; XLRI और वन विभाग तैयार कर रहे विकास का नया मॉडल

Published: Sun, 24 May 2026 11:23 PM (IST)Updated: Tue, 26 May 2026 08:37 PM (IST)

XLRI और वन विभाग दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी के 85 गांवों के सुनियोजित विकास के लिए एक मास्टर प्लान तैयार ...और पढ़ें

दलमा में पहाड़ की चोटी पर बना मंदिर।

दलमा में पहाड़ की चोटी पर बना मंदिर।

HighLights

  1. XLRI और वन विभाग दलमा के 85 गांवों का करेंगे विकास।

  2. मास्टर प्लान अगस्त 2026 तक सरकार को सौंपा जाएगा।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। हाथियों के प्राकृतिक आवास के लिए विश्व प्रसिद्ध दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी (इको सेंसिटिव जोन) में बसे 85 गांवों के सुनियोजित विकास की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। विश्व प्रसिद्ध बिजनेस स्कूल एक्सएलआरआई (XLRI) और वन विभाग के बीच हुए एमओयू (MoU) के तहत अब इन गांवों की तस्वीर बदलने का मास्टर प्लान अंतिम चरण में है। 
 
इस बेहद महत्वाकांक्षी परियोजना का ब्लूप्रिंट अगस्त 2026 तक सरकार को सौंप दिया जाएगा। परियोजना के मार्गदर्शक और एक्सएलआरआई के प्रोफेसर रघुराम टाटा ने इस योजना को लेकर ग्रामीणों से सीधा संवाद शुरू कर दिया है। 
 
इसी कड़ी में शनिवार को मकुलाकोचा में दलमा क्षेत्र के 32 गांवों के प्रतिनिधियों और रविवार को भादूडीह में 53 गांवों के प्रतिनिधियों के साथ मैराथन बैठक की गई। इस दौरान ग्रामीणों से उनके हक, जरूरत और सुझावों पर विस्तृत चर्चा कर विकास का खाका तैयार किया गया।


पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के साथ 'इको-डेवलपमेंट' 

दैनिक जागरण से विशेष बातचीत में प्रो. रघुराम टाटा ने स्पष्ट किया कि उनका मुख्य उद्देश्य दलमा के सभी 85 गांवों में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना विकास की बयार लाना है।

प्रो. रघुराम टाटा ने बताया क‍ि दलमा में विकास कार्य इस तरह से डिजाइन किए जा रहे हैं जिससे स्थानीय ग्रामीणों की जीवनशैली और आजीविका बेहतर हो। लेकिन, इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि वहां की जैव विविधता, घने जंगलों और हाथियों के पारंपरिक रास्तों (एलीफेंट कॉरिडोर्स) को कोई नुकसान न पहुंचे।

उन्होंने बताया कि हर गांव की भौगोलिक स्थिति और जरूरत के अनुसार अलग-अलग योजनाएं बनाई जा रही हैं, जिनमें मुख्य रूप से बुनियादी ढांचा जैसे सड़क, शुद्ध पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा और स्वरोजगार शामिल हैं।


ग्लोबल मार्केट में ब्रांड बनेंगे दलमा के शहद और महुआ 

इस परियोजना का एक सबसे बड़ा आकर्षण दलमा के पारंपरिक वनोत्पादों (Forest Produce) को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाना है। योजना के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
  •     ब्रांडिंग और मार्केटिंग: दलमा क्षेत्र में मिलने वाले शुद्ध शहद, महुआ, जड़ी-बूटियों और अन्य वन उत्पादों को एक्सएलआरआई एक खास ब्रांड के रूप में विकसित करेगा। इन्हें राष्ट्रीय स्तर के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाया जाएगा।
  •     क्लस्टर आधारित लघु उद्योग: ग्रामीण युवाओं और महिलाओं का पलायन रोकने के लिए दलमा के हर 4 से 5 गांवों के बीच क्लस्टर बनाकर लघु उद्योग (Small Scale Industries) स्थापित किए जाएंगे।

 

ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाएगा XLRI  

       योजना का मुख्य लक्ष्य              क्रियान्वयन का तरीका (Strategy) 

  • स्थानीय रोजगार                      ग्रामीणों को उनके घर के पास ही काम के अवसर मिलेंगे ताकि पलायन रुके।
  • तकनीकी प्रशिक्षण                    एक्सएलआरआई की ओर से ग्रामीणों को आधुनिक पैकेजिंग, तकनीक और डिजिटल मार्केटिंग की ट्रेनिंग दी जाएगी।
  • आर्थिक मजबूती                      बिचौलियों के खात्मे से वन उत्पादों का सही दाम सीधे ग्रामीणों के बैंक खातों तक पहुंचेगा।