जमशेदपुर, जासं।  देश के अधिकतर बैंकिंग सेक्टर जहां नॉन परफॉर्मिग एसेट (एनपीए) के चक्कर में सूक्ष्म लघु व मध्यम (एमएसएमई) सेक्टर को ऋण नहीं देना चाहते वहीं झारखंड के कोल्हान की एक ऐसी संस्था है जो बिना गारंटर ही महिला स्वयं सहायता समूहों को ऋण देती है ताकि वे स्वालंबी बन सके।

स्वदेशी जागरण मंच की अनुषंगी इकाई, स्वालंबी झारखंड माइक्रो वेलफेयर डेवलपमेंट सेंटर पिछले सात वर्षो से 3000 से ज्यादा स्वयं सहायता समूहों को ऋण दे चुकी है। वर्तमान में संस्था का टर्नओवर लगभग 4.5 करोड़ रुपये है। कामकाजी महिलाएं जो अपना व्यापार शुरू करना चाहती हैं या व्यापार को बढ़ाना चाहती है उन्हें संस्था 15 से 35 हजार रुपये तक सालाना 12 प्रतिशत के ब्याज पर ऋण देती है।

इस रोजगार के लिए लोन

संस्थान घर पर इटली बनाने, राशन दुकान, लिट्टी दुकान, घर पर सिलाई-कढ़ाई, ब्यूटी पार्लर, टिफिन बनाने, पालना घर सहित अन्य सभी तक के काम के लिए उन्हें ऋण देती है। वहीं, स्वदेशी मेले के माध्यम से कई स्वयं सहायता समूहों को बाजार भी उपलब्ध भी कराया जाता है। इस संस्थान में मुरलीधर केडिया, बंदेशंकर सिंह, मनोज सिंह व अशोक गोयल निदेशक हैं।

ऐसे चुनते हैं महिलाओं को

स्वालंबी झारखंड के पांच ऐसे सदस्य हैं जो इलाके में घूम-घूमकर ऐसी महिलाओं को चुनते हैं या जो महिलाएं संस्थान को आवेदन देती हैं। संस्थान के सदस्य उनके व्यापार का रिसर्च करते हैं। पता करते हैं कि सच में महिला व्यापार कर रही है? बाजार में उसका व्यवहार कैसा है? इन सभी का अध्ययन कर ही उनका वोटर कार्ड, आधार कार्ड व पता लेकर उन्हें ऋण देने के लिए चुना जाता है। संस्थान के सदस्य ऐसे जरूरतमंद पांच महिलाओं का स्वयं सहायता समूह तैयार करते हैं। फिर ऋण देकर उनकी जिम्मेदारी तय करते हैं कि प्रति सप्ताह वे ब्याज सहित पैसा वापस करें।

पांच लाख से शुरू हुआ संस्थान का कारोबार

संस्थान के निदेशक अशोक गोयल बताते हैं कि सात वर्ष पूर्व चार निदेशकों ने मिलकर पांच लाख रुपये से इसे शुरू किया था। वहीं, समाज के बड़े व्यापारियों से शून्य ब्याज दर पर एक वर्ष के लिए भी ऋण लिया जाता है। एक वर्ष बाद ऋण का पैसा उन्हें वापस कर उसके ब्याज से नए सदस्यों को ऋण देने का काम हो रहा है।

संस्थान के सदस्य ही घर पहुंचते हैं घर

ऋण वापसी के लिए महिलाओं को कहीं जाना नहीं पड़ता है। संस्थान के सदस्य प्रति सप्ताह एक निर्धारित समय पर उनके घर जाकर पैसे लेकर आते हैं। इस संस्थान की सबसे खास बात यह है कि जो भी महिलाएं ऋण लेती हैं, संस्थान उनका एक वर्ष के लिए एक इंश्योरेंस कंपनी से जीवन बीमा कराती है। एक वर्ष के अंदर अगर महिला की किसी कारणवश निधन हो गया तो इंश्योरेंस कंपनी से पैसा वापस आ जाता है। सात वर्षो में संस्थान की ऋण वापसी का प्रतिशत 99.9 प्रतिशत है। मात्र दो-तीन महिलाएं ही पैसा नहीं चुका पाई है।

पांच साल से जारी है सफर

पिछले सात वर्षो से संस्थान सफलतापूर्वक बिना गारंटर महिलाओं को ऋण दे रही है। हमारा उद्देश्य महिलाएं स्वालंबी बने। हम महिलाओं से यहीं कहते हैं कि अगर वे पैसे समय पर चुकाएंगी तो दूसरी महिलाओं को ही संस्थान लाभ दे पाएगी।

-अशोक गोयल, निदेशक

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