जमशेदपुर, अन्‍वेष अम्‍बष्‍ठ। Weekly News Roundup Jamshedpur जद्दोजहद के बाद बार एसोसिएशन चुनाव के लिए सात फरवरी को मतदान हुआ। दूसरे दिन मतगणना के बाद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, संयुक्त सचिव, कोषाध्यक्ष, सहायक कोषाध्यक्ष और कार्यकारिणी सदस्य निर्वाचित घोषित कर दिए गए। देखते-देखते 21 दिन बीत गए। लेकिन, विजेता प्रमाणपत्र के लिए तरस रहे हैं। कमेटी कार्यभार नहीं संभाल रही है।

सदस्यों में चुनाव को समय जो जोश था, वह समय बीतने के साथ ठंडा पड़ता जा रहा है। इस बीच अध्यक्ष पद के उम्मीदवार आरएन दास और कार्यकारिणी सदस्य के प्रत्याशी संजीव कुमार और ममता सिंह ने दोबरा मतों की गिनती की मांग कर दी है। इन्होंने चुनाव संचालन समिति को आवेदन दिया है। इससे पूर्व चुनाव के लिए तारीख पर तारीख पड़ रही थी। चुनाव होगा या नहीं, इस पर भी संशय था। लेकिन, जब चुनाव हो गया, प्रत्याशी चुन लिए गए, तो माजरा कुछ और ही नजर आ रहा है। यह चर्चा का विषय है।

मुखबिरी चुस्त तो थानेदारी भी दुरुस्त

थानेदार हर इलाके में अपना मुखबिर रखता है। काम गोपनीयता व विश्वसनीयता के साथ अपराधियों के बीच में ही रहते हुए उनकी गतिविधियों की सूचना साहबों तक सीधे पहुंचाना होता है। 11 फरवरी को मुखबिर की सूचना पर ही सरायकेला पुलिस को बड़ी सफलता मिली, जब नक्सलियों के लिए ले जाए जा रहे 200 राउंड कारतूस सहित सप्लायर को पकड़ लिया गया। चोरी, छिनतई और अवैध पिस्तौल के साथ पकड़े जाने के मामले मेंं इनका करिश्मा खूब चलता है। पुलिस के हाइटेक होने के बावजूद इनका क्रेज बना हुआ है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल कॉल डिटेल और लोकेशन के आधार पर अपराधियों तक पहुंचने में सफल होती है, तो मुखबिर का जमीनी आधार काम आता है। हालांकि, इस मुखबिरी का दूसरा पहलू भी है। सूचना पक्की तो सफलता तय। पॉकेट उतना ही गरम। इलाके में पूरी छूट। सवाल भी इन पर उठते हैं। इसके बावजूद ये थानेदारों की मजबूरी हैं।

बड़ी कीमत न चुकानी पड़ जाए

सेल्फी के जुनून में जान जाने की खबरें आए दिन सुनने को मिल रही हैं। बावजूद रोमांचक और हैरानी में डालने वाली तस्वीर कैद करने का क्रेज कम नहीं हो रहा है। खूब तस्वीरें साझा की जा रही हैं। सोनारी दोमुहानी पुल तो सेल्फी प्वाइंट बन गया है। यहां बाइक और कार पर सवार युवा खूब मस्ती करतेे हैं। कोई स्टंट में मगन, कोई चलती कार पर लटका, तो कोई कार के ऊपर और पुल की मुंडेर पर चढ़कर सेल्फी लेता नजर आता है। इन्हें रोकने-टोकने वाला कोई नहीं। पुल की खूबियां लोगों को लुभा रही हैं। यहां रोज सेल्फी प्रेमियों का जमावड़ा लग रहा हैं। शाम को पुल किनारे वाहनों की कतार लगी रहती है। ऐसी जगहों पर ज्यादातर ये देखा गया है कि परफेक्ट सेल्फी पिक्चर के चक्कर में ऐसे हादसे हो जाते हैं जिसका अंदाजा नहीं होता। जिम्मेदार हाकिम की नजर शायद यहां नहीं पड़ रही है।

ट्विटर से सहमे शहरी थानेदार

ट्विटर ने शहर के थानेदारों की धड़कन बढ़ा दी है। हर कदम फूंक-फूंक कर रख रहे हैं। थाने में शिकायत करने पहुंच रहे लोगों का नाम-पता पूछने से पहले पुलिस वाले अब यह भी पता लगा रहें कि उनका ट्विटर हैंडल है या नहीं। नहीं है तो कोई बात नहीं, लेकिन है तो सावधान की मुद्रा में नजर आते हैं। बिना ब्रेक शिकायत सुन रहे। फौरन जांच कर रहे। कार्रवाई ऑन द स्पॉट कर रहे। डर इस बात का है कि कहीं शिकायतकर्ता सरकार को न ट्वीट कर दे। भला कौन झेले सरकार का ट्वीट। इससे अच्छा है कि पहले ही मामला निपट जाए। पुलिस वालों का डर इसलिए भी बढ़ गया है, क्योंकि सरकार के ट्विटर पर एक्शन में आने के कारण जिले में कई ऐसे लोगों ने भी ट्विटर एकाउंट खोल लिया है, जिनके लिए काला अक्षर भैंस के बराबर है। ऐसे मेें भला कौन रिस्क लेने जाए।

Posted By: Rakesh Ranjan

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