जागरण संवाददाता, जमशेदपुर : देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा की पूजा 17 सितंबर यानी सोमवार को की जाएगी। कल-कारखानों के शहर लौहनगरी में भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने के लिए छोटे बड़े लगभग 120 पंडाल बनते हैं। विश्वकर्मा समाज के लोग तो अपने ईष्ट देव की पूजा करते ही हैं, सभी कल-कारखानों और तमाम दुकानों में भी लोग भगवान विश्वकर्मा को पूजते हैं। इसके साथ लोग अपने-अपने घरों में भी विधि-विधान से विश्वकर्मा पूजा करते हैं। शहर के विश्वकर्मा पूजा का मुख्य आकर्षण टाटा मोटर्स की पूजा होती है। यहां सुबह से लगभग दोपहर 12 बजे तक हर खास-ओ-आम के लिए प्लांट के गेट खुले रहते हैं और यहां कोई भी विश्वकर्मा पूजा में शामिल हो सकता है। टाटा स्टील में कंपनी के अंदर पूजा होती है और यहां केवल कर्मचारी व अधिकारी ही शामिल होते हैं, आम आदमी शामिल नहीं हो पाता है। 17 सितंबर को दिन भर पूजा की धूम रहती है और पूजन-हवन के साथ ही भजन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का दौर देर रात तक चलता रहता है।

इलाकावार बड़े पंडालों की संख्या

सोनारी - 6

साकची - 5

बिष्टुपुर - 10

सिदगोड़ा - 6

सीतारामडेरा - 3

बारीडीह - 5

गोलमुरी - 6

बर्मामाइंस - 10

जुगसलाई - 15

परसुडीह - 7

गोविंदपुर - 4

टेल्को - 2

बिरसानगर - 3

एमजीएम - 5

उलीडीह - 5

आजादनगर - 5

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निर्माण व सृजन के देव हैं भगवान विश्वकर्मा

भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का शिल्पी यानी इंजीनियर कहा जाता है। निर्माण और सृजन के देवता के रूप में इनकी प्रतिष्ठा है। शास्त्रों में वर्णित है कि भगवान विश्वकर्मा ने ही ब्रह्मा के निर्देशानुसार इस पृथ्वी को मनुष्यों के रहने लायक बनाया। यहा तक कि देवताओं के रहने के लिए स्वर्ग लोक, कृष्ण की नगरी द्वारिका, भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र, महादेव का त्रिशूल आदि अस्त्र-शस्त्र भी विश्वकर्मा ने ही बनाए। इसके अलावा रावण की स्वर्ण नगरी लंका, महाभारत काल में हस्तिनापुर, पाडवों की नगरी इंद्रप्रस्थ और जगन्नाथ पुरी के मुख्य मंदिर का निर्माण भी विश्वकर्मा ने ही किया था। यही वजह है कि निर्माण और कौशल के कर्म से जुड़े लोग बड़े पैमाने पर भगवान विश्वकर्मा की पूजा करते हैं। फैक्ट्रियों, वर्कशॉप, बुनकर, मिस्त्री, शिल्पकार और औद्योगिक घरानों में विश्वकर्मा की पूजा की जाती है। इस दिन लोग अपने घरों में भी वाहनों (बाइक-कार आदि) और मशीनों (सिलाई मशीन या अन्य उपकरण) की पूजा करते हैं।

ऐसे करें भगवान की पूजा

विश्वकर्मा पूजा के दिन सुबह स्नान-ध्यान करने के बाद पत्‍‌नी के साथ पूजा के स्थान पर बैठ जाएं। अगर किसी फैक्ट्री या वर्कशॉप या ऑफिस में पूजा होने जा रही हो तो वहा के प्रमुख व्यक्ति को यह काम करना चाहिए। कोशिश करें कि सुबह में ही स्नान-ध्यान के बाद भगवान की पूजा करें। भगवान की फोटो पर माला चढ़ाएं, धूप और दीपक जलाएं फिर अपने औजारों की भी पूजा करें। भगवान विश्वकर्मा को प्रसाद का भोग लगाएं। अंत में हाथ में फूल और अक्षत लेकर विश्वकर्मा भगवान का ध्यान करें।

दिन भर हो सकेगी पूजा

ज्योतिषचार्य पंडित रमाशंकर तिवारी के अनुसार 17 सितंबर को ही सूर्य रात में कन्या राशि में प्रवेश करें। चूंकि भगवान विश्वकर्मा के जयंती के दिन विश्वकर्मा पूजा की जाती है, इसलिए दिन भर पूजा का उत्तम मुहूर्त है।

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Posted By: Jagran