जागरण संवाददाता, जमशेदपुर : सालों से बंद पड़ी इंकैब इंडस्ट्रीज लिमिटेड (केबुल कंपनी) के अधिग्रहण का मामला कोलकाता स्थित एनसीएलटी (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) में है। एनसीएलटी में आगामी तीन अक्टूबर को सुनवाई होनी है। यहां से निर्देश मिलने के साथ ही कंपनी अधिग्रहण मामले का रास्ता खुलेगा। इसे लेकर इंकैब कर्मियों की नजर अब एनसीएलटी पर टिकी है। जब तक कंपनी का अधिग्रहण नहीं होता तब तक कंपनी में यथावत स्थिति बनी रहेगी। न तो किसी प्रकार का निर्माण कार्य किया जाएगा और नहीं कंपनी की किसी संपत्ति की खरीद-बिक्री होगी। इस बात की जानकारी केबुल वर्कर्स यूनियन के महामंत्री रामविनोद सिंह ने दी है। बताया कि कुछ दिन पहले आरआर केबुल के लोग यहां नए सिरे काम करना चाहते थे। उन्होंने उपायुक्त से शिकायत कर कोर्ट के आदेश की जानकारी दी थी। फिर डीसी ने कोर्ट के आदेश को देखते हुए कंपनी परिसर में किसी तरह का निर्माण कार्य नहीं कराने का निर्देश प्रबंधन को दिया था।

2009 में हाईकोर्ट-सुप्रीम कोर्ट दोनों ने दिया था आदेश

कंपनी अधिग्रहण से पूर्व वर्तमान प्रमोटर द्वारा यहां किसी तरह का बदलाव नहीं होगा। पहली बार दिल्ली हाईकोर्ट ने अप्रैल-2009 व सुप्रीम कोर्ट ने 14 मई 2009 में फैसला सुनाया था। उसके बाद जनवरी-17 में हाईकोर्ट ने उसी आदेश को दुबारा निर्गत किया है।

पीएफ की है 12 करोड़ देनदारी

भविष्य निधि (पीएफ) क्षेत्रीय कार्यालय जमशेदपुर का इंकैब इंडस्ट्रीज पर 12 करोड़ देनदारी है। मामले में बीते 23 अप्रैल 2014 को विभाग ने यह आदेश जारी किया था कि जब तक उनकी देनदारी समाप्त नहीं होगी कंपनी की किसी संपत्ति की खरीद-बिक्री नहीं होगी। कंपनी को पीएफ की देनदारी चुकानी ही होगी।

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