चक्रधरपुर (प. सिंहभूम), दिनेश शर्मा। झारखंड के कोल्हान प्रमंडल के आदिवासी कुड़मी बहुल गांवों में वंदना पर्व पर तीन देवताओं की पूजा होती है। ये देवता हैं- ग्राम, धरम और कुदरा। ऐसी मान्यता है कि ये तीनों देवता मिलकर गांव की रक्षा करते हैं। घर परिवार को धन दौलत से भर देते हैं। इन तीनों देवताओं की पसंद भी अगल-अलग है। ग्राम देवता को लाल रंग का मुर्गा पसंद है। धरम देवता को सफेद बेदागी मुर्गा चाहिए। वहीं धन के देव यानी कुदरा देवता काला मुर्गा की बलि से खुश होते हैं। इस रोचक परंपरा को निभाने की तैयारी शुरू हो गई है। गांव के ग्राम देवता को दी जाती है लाल मुर्गे की बलि

ग्राम देवता को लाल रंग के मुर्गे की बलि दी जाती है। इस समाज का मानना है कि ग्राम देवता गांव में शांति बनाए रखते हैं। गांव में महामारी नहीं फैलने देते हैं। ग्राम देवता की दया से ही गांव निरोग रहता है। प्रत्येक ग्रामीण व्यक्तिगत रूप से मुर्गा की बलि चढ़ा कर ग्राम देवता की पूजा करता है।

सादगी के प्रतीक धरम देवता को चाहिए सेफद मुर्गा 

धरम देवता शांति और सादगी के प्रतीक माने जाते हैं। मान्यता है कि सफेद वस्त्र धारण कर घोड़े पर सवार होकर रात भर गांव की पहरेदारी करते हैं। गांव में किसी असामाजिक तत्व व छूत की बीमारी वाले को प्रवेश नहीं करने देते हैं। ग्रामीण धरम देवता को खुश करने के लिए सफेद बेदागी मुर्गा की बलि देते हैं।

धन के देवता कुदरा को पसंद है काले रंग का मुर्गा 

ऐसी मान्यता है कि कुदरा देव धन के देव हैं। इन्हीं के कारण घर में धन-जायदाद की प्राप्ति होती है। वंदना पर्व के दिन हर घर में काले मुर्गे की बलि चढ़ाकर इनकी पूजा की जाती है। इन्हें धन कुदरा के नाम से भी लोग पुकारते हैं। लोग ऐसा मानते हैं कि जिस घर में इनका निवास होता है, उस घर में धन की कमी कभी नहीं होती। 

Posted By: Rakesh Ranjan

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