जमशेदपुर, जेएनएन। पंडित दीनानाथ पांडेय उर्फ दीना बाबा। बाबा अब इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन निधन के बाद एक से बढ़कर एक उनसे जुड़ी रोचक कहानी सामने आई है। बिहार विधानसभा के पूर्व सभापति अमरेंद्र प्रताप सिंह की जुबानी सुनिए झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के जमशेदपुर पूर्वी क्षेत्र से तीन बार विधायक रहे दीनानाथ पांडेय की कहानी।

बकौल अमरेंद्र प्रताप सिंह : दीनानाथ पांडेय के साथ मेरा लंबा सफर रहा। संघ से जुड़ाव के बाद हम दोनों साथ-साथ रहे। वर्ष 1969-70 में टेल्को प्लाजा मार्केट के निकट वर्तमान में विद्याभारती चिन्मया विद्यालय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एक शाखा लगता था उसके मुख्य शिक्षक दीना बाबा थे जबकि वे संघ के मुख्य सेवक थे। कभी-कभार ऐसा भी होता था जब शाखा में वे दोनों ही उपस्थित रहते थे। उस समय बाबा का लड़का रामप्रवीण पांडेय जो 14-15 साल का बच्चा था वह भी शाखा में आने लगा था। कुछ साल बाद बाबा के बेटा ही संघ का प्रमुख बन गया। संघ के नियमानुसार जो भी विलंब से आता था उसे दंड मिलती थी। बाबा अक्सर विलंब से आते थे, इसके दंड में उन्हें दौड़ लगानी होती थी।

देरी के सवाल पर कही कुछ ऐसी बात

अमरेंद्र प्रताप सिंह।

एक दिन ऐसी घटना घटी कि बाबा विलंब से पहुंचे तथा बेटे (प्रमुख) को अधिकारिक अभिवादन किया। इस के बाद बेटे ने विलंब से आने सवाल दाग दिया। फिर क्या था बाबा तमतमा गए, उनका चेहरा लाल हो हो गया गुस्साए बाबा ने कहा- जा आपन माई से पूछ काहे देर हो गईल ह..। उस समय बाप-बेटे के बीच का यह संवाद काफी दिनों तक चर्चा में रहा। 

भाजपा को स्थापित करने में बड़ी भूमिका

दीनानाथ पांडेय काफी भावुक, ईमानदार व जमीन से जुड़े कार्यकता थे। भाजपा को यहां स्थापित कराने में उनकी काफी भूमिका रही। 1995 में उन्हें भाजपा का टिकट नहीं मिला। जिस पर वे बिफर गए थे। उन्होंने उस समय कहा था ठीक  ना भईल है, अब हम निर्दलीय चुनाव लड़ब..। फिर बाबा को मनाया तथा रघुवर जी को उनका आशीर्वाद लेने के लिए टेल्को स्थित उनके आवास पर पहुंचा था। तब उन्होंने कहा था कि आशीर्वाद कवन बात के, हम पार्टी छोड़ दिहनी। अब चल लोगिन मैदान में ..।

कुछ समय शिवसेना में भी रहे

दीनानाथ पांडेय का बिरसानगर स्थित आवास

इस सबके बावजूद हम बाबा के करीब रहे उन्हें सदैव मनाने का काम किया। उन्होंने कुछ समय के लिए शिव सेना से नाता जोड़ा था। इधर तीन-चार माह पूर्व दीना बाबा से मैं उनके बिरसानगर आवास पर मिलने गया था। बाबा बिस्तर पर लेटे हुए थे। हमको देखते हीे वे रो पड़ेे थे। कहा था कि सेवा त बहुत हो ता लेकिन परेशानी काफी बा। बाबा को उस समय भी पार्टी की चिंता थी। कहा कि बहुत मेहनत के बाद अकेले सरकार बनल बा। आज झारखंड में विकट समस्या बा, पार्टी कठिन दौर से गुजर रहल बा। सब लोग मिलके भाजपा के आगे ले चले के काम करे।

दंगा भड़काने का लगा था आरोप

दीनानाथ पांडेय की छवि मजदूर नेता के साथ-साथ कट्टर हिंदू नेता की भी थी। जमशेदपुर में 1979 को दंगा हुआ था, जिसे भड़काने का आरोप उन पर भी लगा था। दंगे की जांच के लिए पटना हाइकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस जितेंद्र नारायण की अध्यक्षता में तीन तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई थी, उसकी रिपोर्ट में कहा गया था कि दंगा भड़काने में दीनानाथ पांडेय का भी हाथ था। वैसे इसमें जमशेदपुर के कई लोगों पर आरोप था। इस रिपोर्ट को बिहार विधानसभा के पटल पर रखा गया, तो खूब हंगामा हुआ। उस वक्त बिहार के मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र थे। 

पत्रकार दिनेश को याद है वो वाकया

उस समय पत्रकार रहे दिनेश्वर प्रसाद सिंह दिनेश बताते हैं कि दंगा के दौरान बिहार के मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर, विपक्ष के नेता डॉ. जगन्नाथ मिश्र और गृह मंत्री वाईबी चव्हाण भी यहां आए थे। सभी ने दीनानाथ पांडेय से कई बार बात की।   

 

Posted By: Rakesh Ranjan

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