जमशेदपुर, जागरण संवाददता। पूर्वी सिंहभूम के जमशेदपुर के कदमा उलियान बस्ती में तीन करोड़ की सरकारी जमीन को रैयती दिखा कर रजिस्ट्री करने के मामले में पूर्व अंचलाधिकारी महेश्वर महतो व तत्कालीन एडीसी सुनील कुमार को बर्खास्त करने की कवायद शुरू हो गई है। दोनों के खिलाफ प्रपत्र-क गठित किया जाएगा।

धांधली सामने आने के बाद उपायुक्त अमित कुमार ने भूमि सुधार और राजस्व विभाग से दोनों अफसरों पर प्राथमिकी दर्ज कराने की अनुमति मांगी थी। विभाग ने प्राथमिकी की जगह सीधे प्रपत्र-क गठित कर बर्खास्त करने का निर्देश दिया है। विभागीय पत्र गुरुवार को उपायुक्त कार्यालय पहुंचा। दोनों अधिकारियों को पूर्व में भी विभागीय नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा गया था।

डीसी ने कराई थी जांच

जिला उपायुक्त ने मामले की जांच कराई थी तो जमशेदपुर के अंचलाधिकारी रहे महेश्वर महतो दोषी पाए गए। महेश्वर महतो वर्तमान में दुमका जिले में मसलिया के अंचलाधिकारी हैं। उपायुक्त ने शिकायत मिलने पर एडीएम सुबोध कुमार व एडीसी सौरव कुमार सिन्हा से जांच कराई थी। जांच टीम ने शिकायत को सही पाया था।

जमशेदपुर अंचल की जमीन

जमशेदपुर अंचल के वार्ड संख्या-दो कदमा उलियान में राजस्व थाना नंबर 1158, खाता नंबर एक, प्लॉट संख्या 1073 पर आठ कट्ठा जमीन तारकेश्वर सिंह, राम अयोध्या सिंह, रेणु सिंह और शांति सिंह ने श्यामलाल सिंह से खरीदी थी। बाजार में इसकी कीमत करीब 40 लाख रुपये प्रति कट्ठा है। सरकारी जमीन को रैयती बताते हुए तत्कालीन अंचलाधिकारी महेश्वर महतो ने तत्कालीन एडीसी सुनील कुमार को 25 जुलाई 2107 को पूरा ब्योरा दिया। इसके आधार पर तत्कालीन एडीसी ने आदेश जारी किया कि जमशेदपुर अंचलाधिकारी की रिपोर्ट व सरकारी अधिवक्ता की राय के आलोक में जमीन के चारों खरीदारों से लगान वसूली जा सकती है। इसी आदेश पर अंचलाधिकारी ने लगान का निर्धारण कर सरकारी जमीन का नामांतरण चारों खरीदारों के नाम कर दिया।

दोबारा जमीन बेचने पर खुला मामला

जमशेदपुर अवर निबंधक कार्यालय के कंप्यूटर में जिले की सरकारी जमीन का डाटा फीड है। जब इन खरीदारों ने जमीन बेचनी चाही और अवर निबंधन कार्यालय पहुंचे तो मामला सामने आया। सेल डीड में दर्ज जमीन का ब्योरा निबंधन कार्यालय के कर्मचारियों ने कंप्यूटर फीड किया तो पता चला कि जमीन सरकारी है। कर्मचारियों ने मामले की जानकारी अवर निबंधक वैभव मणि त्रिपाठी को दी तो उन्होंने जमीन की रजिस्ट्री रोक कर सारे कागजात जब्त कर लिए। तत्कालीन एडीसी सुनील कुमार फिलहाल सुवर्णरेखा बहुद्देशीय परियोजना में अपर निदेशक हैं।

 

Posted By: Rakesh Ranjan