जमशेदपुर (जागरण संवाददाता)। Jamshedpur East Jharkhand Election Result 2019. झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास को उनके ही गढ़ में मात देकर सरयू राय एकबारगी राष्ट्रीय फलक पर छा गए। चाणक्य कहे जाने वाले सरयू राय की पहचान पर्यावरण प्रदूषण व भ्रष्टाचार के खिलाफ लडऩे वाले सामाजिक कार्यकर्ता (सोशल एक्टीविस्ट) के रूप में भी रही है।

सरयू ने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई की शुरुआत 1990 में जिस 'चारा घोटाले से की, उसके शिकार बनकर बिहार के दो पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव व स्व. जगन्नाथ मिश्र बने। दोनों को जेल जाना पड़ा। लालू प्रसाद अब भी जेल की सजा काट रहे हैं। सरयू के तीसरे शिकार झारखंड के निर्दलीय मुख्यमंत्री मधु कोड़ा बने, जिन्हें मनी लांड्रिंग के मामले में जेल जाना पड़ा। सरयू अक्सर कहते हैं कि जहां भी भ्रष्टाचार होता है, उनसे चुप नहीं रहा जाता है। लालू तो उनके अभिन्न मित्र थे। जब उन्होंने गलत होते हुए देखा तो लालूजी को कई बार टोका, नहीं माने। गलती पर गलती करते गए, तो जेल गए। 

विधानसभा चुनाव के दौरान भी सरयू कई बार बोल चुके थे कि वह नहीं चाहते कि उनके हाथ से चौथा मुख्यमंत्री जेल जाए। इसी कड़ी में उन्होंने खनन घोटाला, मैनहर्ट, मोहरदा जलापूर्ति योजना, पावर सबस्टेशन घोटाला आदि मुद्दे उठाए, तो चुनाव के दौरान ही झारखंड हाईकोर्ट में रांची के सूचना अधिकार कार्यकर्ता दुर्गा उरांव ने खनन घोटाला पर जनहित याचिका (पीआइएल) भी दाखिल कर दिया। सरयू के मुताबिक यह केस खुला तो कई बड़े नेता व अधिकारी चपेट में आएंगे। सरयू ने कहा कि इन योजनाओं के सामने चारा घोटाला कुछ भी नहीं है।

सरयू ने तोड़ा निर्दलीय की हार का तिलिस्म

इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बागी प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज करने वाले पूर्व मंत्री सरयू राय ने कई रिकार्ड कायम किए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को तो पराजित किया ही, साथ ही जमशेदपुर से कभी निर्दलीय प्रत्याशी के न जीत पाने वाले तिलस्म को भी ध्वस्त कर दिया। जमशेदपुर की दोनों सीटों की राजनीति के इतिहास का यह पहला मौका है जब कोई निर्दलीय प्रत्याशी विजयी हुआ है। 

इससे पूर्व भाजपा से जिस सीटिंग विधायक का टिकट कटा और उसने निर्दलीय या अन्य दल से चुनाव लड़ा। वो सभी चुनाव हार गए। वर्ष 1995 में भारतीय जनता पार्टी की जमशेदपुर पूर्वी से सीटिंग विधायक दीनानाथ पांडेय का टिकट काटकर पार्टी ने रघुवर दास को पहली बार टिकट दिया। इससे नाराज होकर दीनानाथ पांडेय ने शिवसेना के टिकट पर निर्दलीय चुनाव लड़ा, लेकिन जनता ने उन्हें नकार दिया।

वहीं, वर्ष 2005 में जमशेदपुर पश्चिम विधानसभा सीट से सीटिंग विधायक मृगेंद्र प्रताप सिंह का टिकट कटा और उसके बाद उनके स्थान पर सरयू राय को टिकट दिया गया। इससे नाराज मृगेंद्र बाबू ने राष्ट्रीय जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें भी हार का मुंह भी देखना पड़ा। ऐसे में जब सरयू राय बागी बने तो उन पर इस तिलिस्म को तोडऩे का दारोमदार था। सरयू राय ने इस तिलिस्म को तोडऩे में कामयाब भी रहे और निर्दलीय रहते हुए भाजपा के पांच बार के विधायक और राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास को हरा दिया। 

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