जासं, जमशेदपुर : टाटा स्टील की स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने की खुशी में जमशेदपुरवासियों को जैव विविधता से भरपूर तोहफा दिया था। यहां इस पार्क के बीचो-बीच टाटा समूह के संस्थापक जेएन टाटा की आदमकद प्रतिमा है जहां से पूरे पार्क का नजारा के साथ दलमा पहाड़ भी दिखाई देता है। अधिकतर शहरवासी सुबह-शाम यहां टहलने आते हैं लेकिन शायद ही किसी को यह मालूम होगा कि इस पार्क कितने तरह के पेड़ हैं और उनकी खासियत क्या है। टाटा स्टील की ओर से शुक्रवार सुबह ट्री वॉक का आयोजन किया गया। इसमें दुर्लभ पेड़ों के बारे में जानकारी टाटा मेन हॉस्पिटल की सेवानिवृत्त डा. विजया भरत ने दी।

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सिबा है जुबिली पार्क की शान

पार्क में संस्थापक की प्रतिमा से थोड़ा आगे जुबिली पार्क की शान, सिबा पेड़ है। यह दुनिया का सबसे ऊंचा पेड़ों में से एक है। इसका विशाल आकार कप की तरह है जिसके कारण इसे कप ऑफ ट्री कहा जाता है। यह साउथ अमेरिका का पेड़ है। वहां यह मान्यता है कि मरने के बाद आत्मा पेड़ों के माध्यम से स्वर्ग में जाते हैं इसलिए इस पेड़ की ऊंचाई 60 मीटर से भी अधिक होती है। जुबिली पार्क ही क्या पूरे शहर में मात्र दो पेड़ ही है जो काफी विशाल है और इसकी जड़ भी मजबूत है। इस पेड़ के पत्ते गर्मी में झड़ जाते हैं लेकिन अप्रैल से जून में रुई की तरह फूल खिलते हैं।

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बीएस नरेडी व क्रूम्बेल ने किया था जुबिली पार्क डिजाइन

टाटा स्टील के 50 वर्ष पूरे होने पर 122 एकड़ में फैले जुबिली पार्क को तैयार किया गया था। इस पार्क को दो लैंडस्केप आर्किटेक्ट बीएस नरेडी और जर्मन आर्किटेक्ट जीएच क्रूम्ब्रेल ने मिलकर डिजाइन किया था। दोनों आर्किटेक्ट ने मिलकर जंगल व सामने स्थित तालाब को मिलाकर पार्क का रूप दिया था। इन दोनो आर्किटेक्ट ने ही मैसूर गार्डेन, मुगल गार्डेन और वृंदावन गार्डेन को भी डिजाइन किया था। जुबिली पार्क में अधिकतर पेड़ साउथ अमेरिका, अफ्रीका, केरल, महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों से मंगवाए गए थे।

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पार्क में हैं ये सब भी

पार्क में जैव विविधता को बनाए रखने के लिए कई तरह के आकर्षक पेड़-पौधे हैं। साथ ही इस पार्क में मूगल गार्डेन, चिल्ड्रेन पार्क, जयंती सरोवर, एम्यूसमेंट पार्क व म्युजिकल फांउंटेशन सहित अन्य।

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पं. जवाहर लाल नेहरू ने लगाया था पेड़

पं. जवाहरलाल नेहरू ने एक मार्च 1958 को जुबिली पार्क के अंदर बरगद का एक पौधा लगाया था जो अब विशाल वृक्ष में तब्दील हो गया है। टाटा स्टील ने इस पेड़ को संरक्षित करने के लिए इसके चारों ओर घेरा बना दिया है। साथ ही यहां पंडित नेहरू द्वारा लगाए गए पौधे की जानकारी देने के लिए शिलापट्ट भी लगाया गया है।

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पार्क के कुछ खास पेड़

जुबिली पार्क में दो तरह के पेड़ हैं। इसमें पहला जिमनो स्पर्म यानी वैसे पेड़ जिसमें फूल नहीं होते हैं और दूसरा एंजियो स्पर्म, जिसमें फूल होते हैं।

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महुगनी

पार्क में सेंटर फॉर एक्सिलेंस छोर से प्रवेश करने पर एक लाइन से और जयंती सरोवर की ओर महुगनी पेड़ को लगाया गया था। पार्क में इसकी संख्या 80 है। जिसे साउथ अमेरिका से मंगवाया गया था। इसकी खासियत यह है कि इसमें कीड़े नहीं लगते हैं। इस सदाबहार पेड़ में भूरे रंग का फूल खिलता है।

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तेबोबिया रोसिया (रोज)

साउथ अफ्रीका में पाए जाने वाले इस पेड़ को तेबोबिया यानी चींटी के नाम पर पड़ा है। इस पेड पर मिट्टी की परत होती है जिसमें चीटियों का आशियाना होता है। पार्क में इस प्रजाति के पांच किस्म के पेड़ लगे हुए हैं।

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क्विक फिक्स ट्री : जुबिली पार्क में प्रवेश करने के दौरान बाई ओर एक छोर से छह पेड़ लगाए गए हैं। इसके फूल मटर की तरह होते हैं। यह साउथ अमेरिका में पाया जाता है।

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गोल्डन केसिया : इस पेड़ को स्टेट ट्री ऑफ केरला कहा जाता है। जिसमें अप्रैल से जून माह के बीच सुनहरे रंग के फूल होते हैं।

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बोहेनिया : इस पेड़ को दो भाइयों ने मिलकर तैयार किया है। इस पेड़ के पत्ते ऊंट के पांव के खूर के समान होते हैं। ये हांग-कांग का राष्ट्रीय पेड़ है।

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वेरिगेटा

: इसे स्टेट ट्री ऑफ बिहार कहा जाता है। इस पेड़ पर फरवरी से मार्च के बीच गुलाबी रंग का फूल आने पर ऐसा प्रतीत होता है जैसे पूरे पेड़ पर तितलियां बैठी हुई हों। साकची कंपनी गेट सहित जुबिली पार्क को मिलाकर शहर में मात्र दो पेड़ है। इस प्रजाति में ब्लेकिनिया पेड़ हैं जो हांग-कांग के हैं इसके अलावा परप्यूरा है जिसे एशियाई देश का माना गया है।

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हेवेन लोटस

यह दुनिया का सबसे सुंदर पेड़ माना गया है। शहर का एकमात्र पेड़ जुबिली पार्क में है। साउथ ईस्ट एशिया में पाए जाने वाले इस पेड में रात के समय फूल खिलते हैं और सूर्य उदय होते हुए झड़ जाते हैं इसलिए यदि आपको इसके फूलों को देखना है तो सूर्य की किरणें इस पर पड़े उससे पहले आना होगा।

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कैंडल ट्री

इस पेड़ में संजना की तरह लंबे-लंबे फल आते हैं जिसे दूर से देखने पर लगता है कि बड़े कैंडल यानि मोमबत्तियां लगी हुई है इसलिए इसे कैंडल ट्री कहा जाता है। शहर में इसके मात्र चार पेड़ है। साउथ अमेरिका में पाया जाने वाला इस पेड़ में फूल रात में खिलते हैं।

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गेस्ट ट्री

: इस पेड़ के तने अलग-अलग पिलर की तरह दिखाई देते हैं। इस पेड़ का जिसने इजाद किया है वे काफी मेहमान नवाजी करते थे इसलिए उनके नाम पर ही इसे गेस्ट ट्री नाम दिया गया है। जुबिली पार्क में यह एकमात्र है। इसमें गुलाबी रंग के फूल खिलते हैं जो चाइनीज लैम्प की तरह दिखते हैं।

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प्राइड ऑफ इंडिया

पेड़ के पत्ते हल्के लाल रंग के होते हैं। इसे प्राइड ऑफ इंडिया कहा जाता है। जो महाराष्ट्र में अधिक पाए जाते हैं। इसमें गर्मी के मौसम में फूल आते हैं।

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Edited By: Jagran