जागरण संवाददाता)। शहर में डेंगू फैला है। सैकड़ों लोग टीएमएच, एमजीएम सहित अन्य निजी अस्पतालों व नर्सिग होम में इलाज करा रहे हैं। परिजन प्लेटलेट्स की तलाश में भटक रहे हैं। अपनों की जान जाने की आशंका से ही लोगों के दिल बैठा जा रहा है। डेंगू से बचाव के लिए तमाम जागरूकता अभियान चल पड़े हैं। शिक्षण संस्थानों से लेकर गैर सरकारी संगठनों की ओर से सफाई, जल जमाव रोकने, फ्रिज-कूलर की सफाई के लिए कहा जा रहा है। तरीके भी बताए जा रहे हैं। इन सबके बावजूद अफसरों के कार्यालय भी डेंगू से सुरक्षित नहीं हैं। चाहे वह उपायुक्त कार्यालय हो या फिर सिविल सर्जन का कार्यालय, यहां तक कि सदर अस्पताल भी इससे अछूता नहीं है। इन कार्यालय की छतों पर बिना ढक्कन के लगी पानी की टंकियों में गंदगी की भरमार है। ऐसे में मच्छरों का भिनभिनाना और लार्वा का पानी में पनपना आम बात है।

 

 

 

शौचालय के आसपास जंगल झाड़, नहीं होती सफाई

 

 

उपायुक्त कार्यालय के बीचोबीच पीछे की ओर शौचालय की हालत भी खस्ता है। दोनों ओर जंगल-झाड़ हैं। कूड़ा-कचरा फेंका जाता है। पानी गिरने से यह जगह गीली ही रहती है। ऐसे में मच्छर तो यहां पनपेंगे ही।

 

 

मरीज भी यहां सुरक्षित नहीं

 

 

परसुडीह के खासमहल स्थित सदर अस्पताल को खुले हुए करीब दस वर्ष हो गए हैं। इसे 2017-18 में झारखंड का सर्वश्रेष्ठ अस्पताल का पुरस्कार भी मिल चुका है, लेकिन इसके कई हिस्से अब भी रखरखाव के बिना बेकार पड़े हैं। अस्पताल की पानी टंकी का ढक्कन तक खुला हुआ है, जिसे देखने की जहमत भी कोई नहीं उठाता। टंकी का चौथाई हिस्सा पेड़ के पत्तों, धूल-गर्द से भरा हुआ है। इसी टंकी का पानी मरीज व उनके परिजन पीते होंगे, तो अपने साथ कैसी-कैसी बीमारी ले जाते होंगे। बस इसका अंदाजा ही लगाया जा सकता है।

 

 

सिविल सर्जन ऑफिस जाएं तो नल से पानी बिल्कुल ना पीएं

 

 

 

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