जागरण संवाददाता, जमशेदपुर : सुहासिन महिलाओं ने अपने पतियों की दीर्घायु की कामना के साथ कठिन निर्जला तीज व्रत किया। विवाहित महिलाओं ने 24 घंटे का निर्जला उपवास रखकर पूजा की। इस पूजा में परंपरा के तहत व्रतियों ने बुधवार की देर शाम शंकर, पार्वती तथा गणेश की समहू में पूजा की। बुधवार की रात पूजा के बाद गुरुवार को व्रत करने वाली महिलाएं सुबह दोबारा पूजा करके अपना व्रत तोड़ेंगी। महिलाओं ने नये कपड़े पहनकर सोलह श्रृंगार किया। कई घरों में तीज व्रत की कथा का भी आयोजन किया गया। व्रत करने वाली महिलाओं ने ब्राह्मणों को दान भी किया।

कई घरों तथा परिवारों में व्रत करने वाली महिलाओं ने रतजगा भी किया। इस रतजगा के लिए घरों में गीत-संगीत का भी आयोजन किया गया। पूजा-पाठ के बाद गुरुवार की सुबह शंकर, पार्वती तथा गणेश की प्रतिमाओं का विसर्जन भी किया जाएगा।

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महाराष्ट्र भगिनी समाज ने की सामूहिक पूजा

महाराष्ट्र भगिनी समाज की तरफ से बुधवार को बिष्टुपुर स्थित महाराष्ट्र हितकारी मंडल में हरितालिका तीज की पूजा का आयोजन किया गया। इसमें 21 सुहागन महिलाएं और दो कुमारी कन्याएं प्राची राजे और निकिता देव भी शामिल हुई। भगिनी समाज की सदस्य अल्का जोशी ने पुरोहित के रूप में पूजा-आरती करवाई और तीज की कथा सुनाई। शाम को आरती और रात को जागरण किया गया। अगले दिन गुरुवार को सुबह भोग चढ़ाकर मूर्ति का विसर्जन किया जाएगा। इस अवसर पर भगिनी समाज की अध्यक्ष सुनीता ढब्बू, सचिव अनुप्रिता देव, ट्रस्टी मृदुला राजे, अचला पुरंदरे, शिल्पा साने सहित अन्य महिलाएं उपस्थित थीं।

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सोलह श्रृंगार कर महिलाओं ने किया नृत्य

तीज महोत्सव को मौके पर नेपाली समाज की महिलाएं सोलह श्रृंगार कर गोलमुरी नेपाली समाज समिति परिसर स्थित पशुपति नाथ मंदिर पहुंचीं और शिव पावर्ती की पूजा अर्चना की। बुधवार की शाम करीब साढ़े चार बजे तक पूजा चली। जिसके बाद महिलाओं ने समिति परिसर में ही संगीत के धुन पर नृत्य करना शुरू कर दिया। महिलाएं निर्जला व्रत रखने के बावजूद अपने अपने पतियों को रिझाने के लिए उनके सामने जमकर नृत्य करती रहीं। वहीं व्रतधारी महिलाएं शाम को अपने अपने घर बाद अपने पति के पांव पानी से धोकर उस पानी को प्रसाद समझ कर ग्रहण किया और पति की लंबी उम्र की कामना की।

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छत्तीसगढ़ी समाज ने की पूजा अर्चना

तीज त्योहार को लेकर छत्तीसगढ़ी समाज की महिलाओं ने बुधवार को निर्जला व्रत रखा। दोपहर बाद मायके से आए साड़ी पहनकर सोलह श्रृंगार भी किया। शिव पार्वती की पूजा करने के बाद अपने पति की आरती उतारी। समाज की महिलाओं ने अपने अपने घरों में पूजा अर्चना की।

Posted By: Jagran