जमशेदपुर, जासं। देश के वैसे करदाता जिनका केंद्रीय उत्पाद व सेवा शुल्क विभाग में 31 जून 2019 से पहले का वित्तीय लेन-देन का कोई विवाद है, वे ऐच्छिक रूप से कुल क्लेम राशि का 30 से 40 प्रतिशत राशि देकर मध्यस्थता कर सकते हैं। उन्हें इसके लिए कोई ब्याज या पेनाल्टी भी नहीं देना होगा।

इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंस ऑफ इंडिया, जमशेदपुर शाखा द्वारा बिष्टुपुर स्थित एक होटल में टैक्स ऑडिट व सबका विकास (लेगिसी डिसपुट रिजोल्यूशन स्कीम) पर एक दिवसीय कार्यशाला हुई। इसे संबोधित करते हुए दिल्ली से आए वक्ता केके अग्रवाल ने बताया कि ऐसे करदाता पहली सितंबर से 31 दिसंबर 2019 से पहले 30 से 40 प्रतिशत रकम देकर कानूनी दांव पेच से बच सकते हैं। उनके अनुसार वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा था कि लगभग 3.80 हजार करोड़ रुपये कानूनी दांव पेच में फंसी है इसलिए सरकार लेगसी डिसपुट रिजॉल्यूशन स्कीम के तहत करदाताओं को इससे निकलने का मौका दे रही है।

आइटीआर 6 की दी जानकारी

दिल्ली से आए एक अन्य वक्ता दीपक भोलूसरिया ने फार्म 3सीडी व आइटीआर 6 के बारे में विस्तार से बताया। इस मौके पर शाखा चेयरमैन विनोद सरायवाला ने दीप प्रज्वलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया। इस मौके पर सचिव पंकज संघारी, वाइस चेयरमैन संजय गोयल, जैमीपॉल के सीए गांधी, मनीष केडिया, राजेश अग्रवाल, सीए विश्वनाथ अग्रवाल, अजय बजेसरिया, आनंद अग्रवाल, आकांक्षा केडिया, नेहा अग्रवाल, पवन पेरिवाल सहित बड़ी संख्या में संस्थान के छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।  

Posted By: Rakesh Ranjan

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