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टाटा स्टील के NS ग्रेड कर्मचारियों में असंतोष, वेतन स्ट्रक्चर में बदलाव की मांग 

Published: Tue, 09 Jun 2026 02:13 AM (IST)

टाटा स्टील के एनएस ग्रेड कर्मचारियों में 2019 के वेतन समझौते को लेकर असंतोष है, क्योंकि इसमें मिनिमम गारंटीड बेनिफिट ...और पढ़ें

टाटा स्टील के कर्मचारी। फाइल फोटो

टाटा स्टील के कर्मचारी। फाइल फोटो

HighLights

  1. 2019 वेतन समझौते से मिनिमम गारंटीड बेनिफिट बाहर, कर्मचारियों को नुकसान।

  2. कर्मचारी भविष्य के लिए 2012 के वेतन समझौते को आधार बनाने की मांग।

  3. वेतन विसंगति से मूल वेतन, इंक्रीमेंट और भविष्य की आय प्रभावित।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। टाटा स्टील के न्यू सीरीज (एनएस) ग्रेड के कर्मचारियों में वर्ष 2019 के वेतन समझौते को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है। एनएस ग्रेड के कमेटी मेंबरों का आरोप है कि सितंबर 2019 में हुए वेतन समझौते के दौरान कर्मचारियों के पे-स्केल में मिनिमम गारंटीड बेनिफिट (एमजीबी) को शामिल नहीं किया गया, जिसके कारण कर्मचारियों को बेसिक वेतन, वार्षिक इंक्रीमेंट और भविष्य की आय में लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है।

कमेटी मेंबरों का कहना है कि आगामी वेतन समझौते में वर्ष 2019 के बजाय वर्ष 2012 के वेतन समझौते को आधार बनाया जाना चाहिए, ताकि वर्षों से चली आ रही वेतन विसंगतियों को दूर किया जा सके। एनएस ग्रेड में लगभग 7,000 कर्मचारी कार्यरत हैं।

इंक्रीमेंट और बेसिक वेतन में हुआ नुकसान

कर्मचारी प्रतिनिधियों के अनुसार, एमजीबी को ग्रेड स्ट्रक्चर में नहीं जोड़ने के कारण एनएस-1 ग्रेड के कर्मचारियों को वार्षिक इंक्रीमेंट में करीब 100 रुपये तथा एनएस-12 ग्रेड के कर्मचारियों को लगभग 210 रुपये तक का नुकसान हुआ है। वहीं बेसिक वेतन में यह अंतर 770 रुपये से लेकर 1,470 रुपये तक पहुंच गया है।

उनका दावा है कि इस व्यवस्था के कारण कर्मचारियों की आय पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ा है। अनुमान के अनुसार प्रत्येक कर्मचारी को प्रतिवर्ष लगभग 1,190 रुपये तथा सात वर्षों में करीब 8,330 रुपये का प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान हो चुका है।

डीए शून्य और एफडीए में भी कटौती का आरोप

एनएस ग्रेड कर्मचारियों का कहना है कि 2019 के समझौते के बाद नई नियुक्तियों के लिए महंगाई भत्ता (डीए) शून्य कर दिया गया। इसके साथ ही फिक्स्ड डीए (एफडीए) को 800 रुपये से घटाकर 500 रुपये कर दिया गया। एमजीबी को भी समाप्त कर दिए जाने से कर्मचारियों की इंक्रीमेंटल वैल्यू प्रभावित हुई।


कर्मचारी प्रतिनिधियों ने उदाहरण देते हुए बताया कि यदि अगस्त 2024 में एनएस-7 ग्रेड पर नियुक्त किसी कर्मचारी को पुरानी व्यवस्था के अनुसार वेतन मिलता तो उसका बेसिक 29,570 रुपये, एफडीए 800 रुपये तथा डीए मद में 8,500 रुपये मिलाकर कुल 38,870 रुपये बनता।

जबकि नई व्यवस्था में उसे 23,495 रुपये बेसिक और 500 रुपये एफडीए सहित कुल 23,995 रुपये पर नियुक्ति मिली। इस प्रकार शुरुआती स्तर पर ही लगभग 14,875 रुपये प्रतिमाह का अंतर पैदा हो गया।

भविष्य और बच्चों की शिक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

कर्मचारियों का कहना है कि वेतन संरचना में आए इस अंतर का असर केवल वर्तमान आय तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की वित्तीय सुरक्षा पर भी पड़ रहा है। वर्ष 2011-12 में नियुक्त कर्मचारियों के बच्चों की उच्च शिक्षा का समय वर्ष 2030 के आसपास आएगा। ऐसे में मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी महंगी पढ़ाई का खर्च उठाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

कर्मचारियों का दावा है कि वर्तमान में भी कई कर्मचारी कर्मचारी भविष्य निधि (पीएफ) और विभिन्न सहकारी समितियों से लिए गए ऋणों के बोझ तले दबे हुए हैं। ऐसे में वेतन विसंगति दूर नहीं होने पर आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है।

वर्तमान और अनुमानित ग्रेड स्ट्रक्चर

ग्रेड वर्तमान ग्रेड स्ट्रक्चर अनुमानित ग्रेड स्ट्रक्चर
NS-1 17,295 - 505 20,895 - 650
NS-2 17,495 - 510 21,190 - 636
NS-3 17,695 - 525 21,490 - 645
NS-4 19,405 - 575 23,890 - 695
NS-5 19,655 - 590 24,240 - 730
NS-6 19,905 - 605 24,490 - 735
NS-7 23,495 - 710 29,570 - 880
NS-8 23,845 - 725 30,020 - 906
NS-9 24,195 - 740 30,420 - 912
NS-10 25,205 - 770 31,635 - 949
NS-11 25,605 - 790 32,085 - 963
NS-12 26,105 - 810 32,630 - 980