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टाटा स्टील की नई पहल: प्लांट में हादसे पर 10 मिनट में TMH पहुंचेगा पीड़ित, बनेगा स्पेशल 'ग्रीन कॉरिडोर'

Published: Thu, 17 Sep 2026 08:19 AM (IST)

टाटा स्टील ने प्लांट में दुर्घटना पीड़ितों को 'गोल्डन आवर्स' में बचाने के लिए नई पहल की है। इसके तहत, ...और पढ़ें

टाटा स्टील से बनेगा स्पेशल 'ग्रीन कॉरिडोर'

टाटा स्टील से बनेगा स्पेशल 'ग्रीन कॉरिडोर'

HighLights

  1. दुर्घटना पीड़ितों को 'गोल्डन आवर्स' में बचाने हेतु टाटा स्टील की पहल।

  2. प्लांट से टीएमएच तक 10 मिनट में ग्रीन कॉरिडोर बनेगा।

  3. भूमिगत खदानों के बाहर लाइफ सपोर्ट सर्विस विकसित करने पर जोर।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। टाटा स्टील में यदि कोई दुर्घटना (ऊंचाई से गिरने, गैस लगने, जलने या हार्ट अटैक) होती है तो प्लांट से लेकर टाटा मेन हॉस्पिटल तक ग्रीन कॉरिडोर बनाकर गोल्डन आवर्स में संबधित कर्मचारी की जान को बचाया जाएगा।

कंपनी परिसर स्थित स्टीलेनियम सभागार में बुधवार शाम सेविंग लाइफ इन इंडस्ट्रियल ट्रामा पर एक कार्यशाला हुई जिसमें टीएमएच के पेड्रियाटिक सर्जन डॉ. शिशिर कुमार ने यह जानकारी दी। 

उन्होंने बताया कि किसी भी दुर्घटना पर प्लांट के चीफ सुपरवाइजर टीएमएच के रेसीडेंट मेडिकल ऑफिसर (आरएमओ) को फोन करेंगे। इसके बाद वे ही टाटा स्टील व टीएमएच के सिक्योरिटी व एडमिन हेड को सक्रिय करते हुए ग्रीन कारिडोर तैयार करेंगे और पूरे रास्ते ट्रैफिक से बचाते हुए संबधित कर्मचारी को 10 मिनट में ही टीएमएच पहुंचाया जाएगा। एक सिंगल प्वाइंट पर सूचना देने के साथ ही पूरा सिस्टम सक्रिय हो जाएगा। 

सरा कर्मचारी प्लांट मेडिकल टीम को सूचना दें

इस दौरान उन्होंने पावर प्रजेंटेशन के माध्यम से बताया कि किसी भी दुर्घटना में यदि कोई कर्मचारी गंभीर रूप से चोटिल होता है तो साथी कर्मचारी की यह जिम्मेदारी है कि वे उक्त कर्मचारी का पल्स जांच करें। सांस नहीं आने पर उन्हें सीपीआर दें और दूसरा कर्मचारी प्लांट मेडिकल टीम को इसकी सूचना दें। 

कार्यक्रम के दौरान टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट (कारपोरेट सर्विसेज) डीबी सुंदर रामम, टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव चौधरी, डिप्टी प्रेसिडेंट शैलेश सिंह सहित विभिन्न विभागों के चीफ, हेड व कमेटी मेंबर उपस्थित थे।

भूमिगत माइंस के बाहर विकसित करना है लाइफ सपोर्ट सर्विस: वीपी

वाइस प्रेसिडेंट डीबी सुंदर रामम ने अपने संबोधन में इस कार्यक्रम की प्रशंसा की। साथ ही कहा कि शहरी क्षेत्र में ग्रीन कॉरिडोर की व्यवस्था संभव है लेकिन भूमिगत माइंस क्षेत्र, जामाडोबा, जोड़ा जैसे क्षेत्रों में कर्मचारी काम करते हुए यदि चोटिल होते हैं तो उन्हें बाहर निकालने में ही गोल्डन आवर्स का समय खत्म हो जाएगा। 

इसलिए हमें माइंस के बाहर ही एंबुलेंस में लाइफ सपोर्ट सर्विस को विकसित करना होगा ताकि गोल्डन आवर्स में साथी कर्मचारी की जान को बचाई जा सके।