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    टाटा स्टील अब खुद कर सकेगी कोयले की खोज, केंद्र ने दी शक्ति; खनन प्रक्रिया होगी और तेज

    Updated: Sat, 29 Nov 2025 09:33 AM (IST)

    टाटा स्टील के नेचुरल रिसोर्सेज डिवीजन को केंद्र सरकार ने कोयला और लिग्नाइट की खोज के लिए मान्यता दी है। इससे खनन प्रक्रिया में लगने वाला समय कम होगा और कंपनी अपनी उत्पादन क्षमता को 2030 तक 40 मिलियन टन तक बढ़ाने के लक्ष्य को प्राप्त कर सकेगी। टाटा स्टील अब नए कोल ब्लॉक्स में खनिजों का पता खुद लगा सकेगी, जिससे कच्चे माल की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

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    टाटा स्टील अब खुद कर सकेगी कोयले की खोज

    जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। टाटा स्टील के लिए यह एक बड़ी और राहत भरी खबर है। केंद्र सरकार ने कंपनी की नेचुरल रिसोर्सेज डिवीजन को कोयला और लिग्नाइट की खोज (सर्वेक्षण) करने के लिए आधिकारिक तौर पर मान्यता दे दी है। 

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    अब टाटा स्टील को कोयले के भंडार खोजने के लिए बार-बार सरकारी प्रोस्पेक्टिंग लाइसेंस का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। सरकार के इस फैसले से खनन प्रक्रिया शुरू करने में लगने वाले समय में करीब छह महीने की कमी आएगी, जिससे न केवल टाटा स्टील बल्कि देश की ऊर्जा जरूरतें भी तेजी से पूरी हो सकेंगी।

    कोयला मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना में टाटा स्टील (पूर्वी सिंहभूम) समेत निजी क्षेत्र की कुल 18 एजेंसियों को यह अधिकार सौंपा है। ये सभी एजेंसियां क्वालिटी काउंसिल आफ इंडिया से मान्यता प्राप्त हैं।

    2030 के लक्ष्य और कच्चे माल की सुरक्षा

    टाटा स्टील अपनी उत्पादन क्षमता को तेजी से बढ़ा रही है। कंपनी का लक्ष्य 2030 तक अपनी क्षमता को 40 मिलियन टन सालाना तक ले जाने का है। इतनी विशाल क्षमता के लिए निर्बाध कोयले और लौह अयस्क की आपूर्ति सबसे बड़ी चुनौती है। 

    वर्तमान में टाटा स्टील के पास नोवामुंडी, झरिया और वेस्ट बोकारो में प्रमुख कोयला खदानें हैं, जो कंपनी की लाइफलाइन हैं। एमएमडीआर एक्ट में हुए संशोधनों के तहत देश में कई कैप्टिव माइंस की लीज अवधि 2030 तक सुनिश्चित की गई थी। 

    ऐसे में, भविष्य की जरूरतों और लीज की समयसीमा को देखते हुए नए भंडारों की खोज करना कंपनी के लिए अनिवार्य है। अब प्रोस्पेक्टिंग एजेंसी का दर्जा मिलने से टाटा स्टील को यह रणनीतिक लाभ मिलेगा कि वह नए कोल ब्लॉक्स में छिपे खनिजों का पता खुद लगा सकेगी। इससे कंपनी की रा मटेरियल सिक्योरिटी (कच्चे माल की सुरक्षा) बेहद मजबूत होगी।

    क्या बदला है नियमों में?

    पहले निजी कंपनियों को किसी भी क्षेत्र में खनिज खोजने के लिए सरकार से हर बार अलग से अनुमति और लाइसेंस लेना पड़ता था। यह प्रक्रिया बेहद जटिल और लंबी थी। 

    अब एमएमडीआर अधिनियम, 1957 की धारा 4 के तहत इन मान्यता प्राप्त एजेंसियों को अधिकृत कर दिया गया है। इससे कोल ब्लाक पाने वाली कंपनियों (अलाटी) को यह आजादी होगी कि वे सरकारी एजेंसियों पर निर्भर रहने के बजाय टाटा स्टील जैसी सक्षम निजी एजेंसियों से भी सर्वे करा सकें। 

    कोयला मंत्रालय का कहना है कि एजेंसियों के इस पूल को बढ़ाने का मकसद निजी क्षेत्र की कुशलता और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करना है। इससे एक्सप्लोरेशन (खोज) के काम में तेजी आएगी और कोयला व लिग्नाइट का उत्पादन जल्दी शुरू हो सकेगा। यह कदम आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत ऊर्जा क्षेत्र में देश को स्वावलंबी बनाने की दिशा में उठाया गया है।

    इन प्रमुख कंपनियों को भी मिली जिम्मेदारी

    टाटा स्टील की नेचुरल रिसोर्सेज डिवीजन (पूर्वी सिंहभूम) के अलावा सरकार ने देश के विभिन्न हिस्सों की अन्य 17 कंपनियों को भी इस कार्य के लिए चुना है। इनमें कोलकाता की इंडियन माइन प्लानिंग एंड कंसल्टेंट्स, यूनाइटेड एक्सप्लोरेशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और महेश्वरी माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। 

    इसके अलावा गुरुग्राम की साउथ वेस्ट जियोलॉजिकल एक्सप्लोरेशन लिमिटेड और मेरोक्स माइनिंग साल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड को भी इसमें जगह मिली है।

    सरकार की इस सूची में रांची की जेम्स प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, पूर्वी खासी हिल्स की नोवोमाइन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, बिडवान की माइनिंग एसोसिएट्स प्राइवेट लिमिटेड और चंद्रपुर की रेमको कोल एक्सप्लोरेशन प्राइवेट लिमिटेड भी शामिल हैं। 

    दक्षिण भारत से धर्मपुरी की जियोटेक्निकल माइनिंग सॉल्यूशंस, हैदराबाद की सीएमएमसीओ टेक्नोलाजी सर्विसेज लिमिटेड और नमक्कल की एपीसी ड्रिलिंग एंड कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को जिम्मेदारी सौंपी गई है। 

    वहीं, दिल्ली की सुरमाइन कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड, नागपुर की कार्तिकेय एक्सप्लोरेशन एंड माइनिंग सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड व जास्नी जियोटेक प्राइवेट लिमिटेड और अहमदाबाद की माइनिंग टेक कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड व रेवेल कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड को भी कोयला खोज के लिए अधिकृत किया गया है।