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टाटा स्टील बंचिंग विवाद: यूनियन ने प्रबंधन को दिए 3 अहम सुझाव, वित्तीय बोझ का हवाला देकर प्रबंधन ने साधी चुप्पी

Published: Thu, 08 Oct 2026 01:00 AM (IST)

टाटा स्टील में बंचिंग व्यवस्था को लेकर प्रबंधन और टाटा वर्कर्स यूनियन के बीच बैठक हुई, जिसमें यूनियन ने कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए तीन अहम सुझाव दिए।

दो घंटे तक चली इस वार्ता में यूनियन नेतृत्व ने कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए तीन मुख्य सुझाव प्रबंधन के समक्ष रखे, हालांकि कोई अंतिम फैसला नहीं हो सका।

दो घंटे तक चली इस वार्ता में यूनियन नेतृत्व ने कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए तीन मुख्य सुझाव प्रबंधन के समक्ष रखे, हालांकि कोई अंतिम फैसला नहीं हो सका।

HighLights

  1. बंचिंग विवाद पर टाटा स्टील प्रबंधन और यूनियन के बीच बैठक।

  2. यूनियन ने कर्मचारियों के हितों के लिए तीन अहम सुझाव दिए।

  3. प्रबंधन ने कंपनी पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ न डालने की शर्त रखी।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। बंचिंग व्यवस्था को लेकर उत्पन्न विवाद के समाधान के लिए टाटा स्टील प्रबंधन और टाटा वर्कर्स यूनियन के शीर्ष नेतृत्व के बीच बुधवार सुबह फिर बैठक हुई। 

 
दो घंटे तक चली इस वार्ता में यूनियन नेतृत्व ने कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए तीन मुख्य सुझाव प्रबंधन के समक्ष रखे, हालांकि कोई अंतिम फैसला नहीं हो सका।
 

2200 कर्मचारी हो रहे प्रभावित 

टाटा स्टील में हाल ही में हुए वेतन समझौते के बाद लागू बंचिंग व्यवस्था के कारण लगभग 2,200 कर्मचारी सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं।
 
कंपनी प्रबंधन ने वरीयता को आधार बनाते हुए इन कर्मचारियों की 'डेट ऑफ इंक्रीमेंट' की अवधि तीन से 11 महीने तक बढ़ा दी है, जिसका विरोध हो रहा है।
 

यूनियन के 3 मुख्य सुझाव: 

  • उच्च शिक्षा लाभ पर छूट: हायर एजुकेशन का एडिशनल बेनिफिट लेने वाले कर्मचारियों का इंक्रीमेंट जारी रखा जाए और वेतन पर वरीयता की व्यवस्था को इस ग्रेड रिवीजन से हटाया जाए।
  • इंक्रीमेंट अवधि सीमित करना: जिन कर्मचारियों का इंक्रीमेंट 1 जनवरी के बाद है, उसे अधिकतम 6 महीने बढ़ाकर 1 जुलाई और जिनका 1 जुलाई के बाद है, उसे 1 दिसंबर किया जाए।
  • पर्सनल अलाउंस में समायोजन: प्रभावित कर्मचारियों के इंक्रीमेंट व अन्य लाभों को पर्सनल अलाउंस में जोड़ा जाए ताकि उन्हें आर्थिक नुकसान न हो।
 

आर्थिक बोझ न बढ़ने पर अड़ा प्रबंधन 

सुबह साढ़े नौ बजे शुरू हुई बैठक में प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि ऐसे किसी विकल्प पर विचार किया जाएगा जिससे कंपनी पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ न पड़े। नतीजा न निकलने के बावजूद यूनियन ने कहा है कि समाधान होने तक बैठकों का दौर जारी रहेगा।
 
बैठक में प्रबंधन की ओर से चीफ सीएचआरओ जुबिन पालिया, राहुल दुबे व उत्कर्ष भारद्वाज तथा यूनियन की ओर से अध्यक्ष संजीव चौधरी, डिप्टी प्रेसिडेंट शैलेश सिंह और महामंत्री सतीश सिंह शामिल थे।