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RBI के नियमों से बचने की कवायद: NBFC का दर्जा छोड़ेगी टाटा संस, निजी बना रहेगा समूह का ढांचा

Published: Mon, 28 Sep 2026 10:39 PM (IST)

टाटा संस शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने से बचने के लिए एक रणनीतिक कदम उठा रही है। टाटा ट्रस्ट्स ने ...और पढ़ें

आरबीआई के सख्त नियमों से बचाने के लिए बहुलांश हिस्सेदार टाटा ट्रस्ट्स ने एक अप्रत्याशित रणनीतिक दांव चला है।

आरबीआई के सख्त नियमों से बचाने के लिए बहुलांश हिस्सेदार टाटा ट्रस्ट्स ने एक अप्रत्याशित रणनीतिक दांव चला है।

HighLights

  1. टाटा संस शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने से बचने की रणनीति।

  2. टाटा ट्रस्ट्स ने दो परिचालन कंपनियों के विलय का प्रस्ताव दिया।

  3. आरबीआई के NBFC और CIC नियामक दायरे से बाहर निकलने का लक्ष्य।

जासं, जमशेदपुर। देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने की मुख्य होल्डिंग कंपनी टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध (लिस्टिंग) कराने के भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के सख्त नियमों से बचाने के लिए बहुलांश हिस्सेदार टाटा ट्रस्ट्स ने एक अप्रत्याशित रणनीतिक दांव चला है।
 
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, ट्रस्ट्स ने समूह की दो सक्रिय परिचालन कंपनियों- टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस (TESS) और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स (TCE) का सीधे टाटा संस में विलय करने का विधिवत प्रस्ताव निदेशक मंडल (बोर्ड) को भेजा है।
 

बदल जाएगा वित्तीय ढांचा, छूटेगा NBFC का दायरा 

टाटा संस में 66 प्रतिशत की निर्णायक हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट्स की मंशा कंपनी का मूल वित्तीय ढांचा बदलने की है, जिससे वह आरबीआई के अपर-लेयर एनबीएफसी और कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) के विनियामक दायरे से स्वतः बाहर निकल जाए। 
 
31 मार्च के वित्तीय आंकड़ों के आधार पर पुनर्गठन के बाद मूल कंपनी का परिचालन राजस्व बढ़कर 1,05,043 करोड़ रुपये पहुंच जाएगा, जो उसकी कुल आमदनी का 64.3 प्रतिशत होगा।
 
इसके बाद वित्तीय संपत्तियों से आय घटकर 40,072 करोड़ रुपये रह जाएगी। कंपनी की कुल 2,00,158 करोड़ रुपये की शुद्ध परिसंपत्तियों (निवल संपत्तियों) में समूह कंपनियों के शेयरों का अनुपात 90 फीसदी से नीचे आते ही टाटा संस को सीआईसी (CIC) का पंजीकरण सरेंडर करना होगा।
 

नोएल टाटा और बोर्ड के टकराव के बीच उठाया कदम 

यह बड़ा प्रस्ताव ऐसे नाजुक मोड़ पर सामने आया है जब अक्टूबर 2024 से ट्रस्ट की अगुआई कर रहे नोएल टाटा और टाटा संस के बोर्ड के बीच लगातार खींचतान जारी है। 
 
चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के नेतृत्व वाला बोर्ड लिस्टिंग की तैयारी में जुटा था, जबकि ट्रस्ट्स समूह के 100 साल से भी अधिक पुराने निजी स्वरूप को बनाए रखने पर अडिग है।
 
हाल ही में 17 सितंबर को चंद्रशेखरन के कार्यकाल विस्तार को लेकर भी मतभेद उभरकर सामने आए थे। ट्रस्ट्स ने ध्यान दिलाया कि 2004 में अलग सूचीबद्ध होने से पहले टीसीएस (TCS) भी टाटा संस के ही भीतर एक इकाई के रूप में काम करती थी। 
 
यदि आरबीआई इस स्वैच्छिक विलय योजना को अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) दे देता है, तो टाटा संस को शेयर बाजार में आईपीओ (IPO) लाने की बाध्यता से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी।