जमशेदपुर, जासं। रक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित रक्षा उपकरण निर्माता कंपनी भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीइएमएल) की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी लेने के लिए जिन कंपनियों ने बोली लगाई है, उसमें टाटा मोटर्स भी शामिल है।

इसके अलावा बोली लगाने वालों में अशोक लीलैंड लिमिटेड, भारत फोर्ज लिमिटेड और हैदराबाद स्थित मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एमइआइएल) है। बीइएमएल तीन प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों रक्षा व एयरोस्पेस, खनन व निर्माण, रेल व मेट्रो में काम करती है। इन चारों कंपनियों ने बीइएमएल में सरकार की हिस्सेदारी खरीदने के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (इओआइ) जमा किया था। चयन के बाद इन्हें प्रस्ताव के लिए अनुरोध दस्तावेज जारी किया गया है। बीइएमएल के डेटा रूम और उत्पादन साइटों तक पहुंच प्रदान की गई है, ऊपर बताए गए दो लोगों में से एक ने नाम न छापने का अनुरोध करते हुए कहा।

सैन्य हार्डलेयर निर्माता है बीइएमएल 

बीइएमएल, पृथ्वी मिसाइल लांचर जैसे सैन्य हार्डवेयर का निर्माता, तीन प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों- रक्षा और एयरोस्पेस, खनन और निर्माण, और रेल और मेट्रो में काम करता है। इसके बेंगलुरु, कोलार गोल्ड फील्ड्स, मैसूर, पलक्कड़ व चिक्कमगलुरु समेत नौ प्लांट हैं। एसबीआई कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड बीइएमएल की विनिवेश योजना के लिए लेनदेन सलाहकार है। बीइएमएल के संचालन की रणनीतिक प्रकृति के कारण शॉर्टलिस्ट की गई फर्मों को पहले चीन या पाकिस्तान के साथ किसी भी व्यावसायिक संबंधों का खुलासा करने के लिए कहा गया था। भारत फोर्ज, टाटा, अशोक लीलैंड और एमइआइएल को ईओआई के बाद चुना गया है और आरएफपी चरण में हैं। उन्होंने योग्यता मानदंड को मंजूरी दे दी है और उचित परिश्रम कर रहे हैं। उपरोक्त दो लोगों में से एक ने कहा।

बीइएमएल सरकार के पास 54 प्रतिशत हिस्सेदारी

सरकार के पास बीइएमएल में 54 प्रतिशत हिस्सेदारी है, ने चार जनवरी को इओआई को कंपनी में अपनी हिस्सेदारी आंशिक रूप से बेचने और प्रबंधन नियंत्रण स्थानांतरित करने के लिए आमंत्रित किया। निवेश और सार्वजनिक संपत्ति विभाग (दीपम) ने शुरू में ब्याज जमा करने की समय सीमा एक मार्च निर्धारित की थी, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 22 मार्च कर दिया। टाटा मोटर्स और अशोक लीलैंड जैसी कंपनियों के बारे में बताया था कि वे अपने रक्षा विनिर्माण व्यवसायों को विकसित करने और मुख्य वाणिज्यिक वाहन व्यवसाय पर निर्भरता कम करने के लिए अपनी रणनीति के तहत बीईएमएल पर नियंत्रण चाहते हैं। हालांकि इसमें खास बात यह है कि बोली लगाने वाली किसी कंपनी ने इस पर आधिकारिक रूप से टिप्पणी नहीं की है।

Edited By: Jitendra Singh