जागरण संवाददाता, जमशेदपुर : भारतीय मूल के ब्रिटिश व्यवसायी संजीव गुप्ता की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। पहले ही आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहे गुप्ता एक नई मुसीबत में फंस गए हैं। इस बार लिबर्टी हाउस ग्रुप के संस्थापक संजीव गुप्ता टाटा समूह की कंपनी टाटा स्टील के निशाने पर आ गए हैं। टाटा स्टील ने संजीव गुप्ता पर 1.1 करोड़ डॉलर (लगभग 80 करोड़ रुपये) का मुकदमा ठोक दिया है।

मामला वर्ष 2017 का है। संजीव गुप्ता पर आरोप है कि उन्होंने तीन मेटल यूनिट्स के पेमेंट में देरी की है। ऐसे में अब भारतीय मूल के संजीव गुप्ता की मुश्किलें बढ़ने वाली है। यहां बताते चले कि संजीव गुप्ता लिबर्टी हाउस ग्रुप के सस्थापक होने के साथ-साथ जीएफजी एलायंस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) व चेयरमैन भी हैं। मिस पेमेंट का यह मामला माइनिंग को लेकर मेटल सप्लाई से जुड़ा हुआ है।

दोनों के बीच 13.9 करोड़ डॉलर का हुआ था सौदा

टाटा स्टील और संजीव गुप्ता की कंपनी के बीच 2017 में स्टील बिजनेस की बिक्री को लेकर बड़ी डील हुई थी। लेकिन डील अंतिम रूप नहीं ले सका और कंपनी पर केस कर दिया। टाटा स्टील ने जो मुकदमा किया है वह साल 2017 में संजीव गुप्ता की थ्री मेटल यूनिट्स के साथ हुए सौदे पर आधारित है। टाटा स्टील ने एक महीने के भीतर संजीव गुप्ता पर दूसरा मुकदमा किया है। एक मई तक पेमेंट नहीं कर पाने के कारण टाटा स्टील ने लिबर्टी हाउस ग्रुप से एक करोड़ पाउंड की मांग कर रहा है। लेकिन लिबर्टी ग्रुप यह कहकर पल्ला झाड़ रही है कि कंपनी मुश्किलों के दौर से गुजर रही है।

मिस पेमेंट बनी गले की फांस

टाटा ग्रुप की ओर से यह आरोप लगाया गया है कि संजीव गुप्ता डील को लेकर लगातार मिस पेमेंट करते आए हैं। इस मिस पेमेंट का वह कोई ठोस आधार भी नहीं बता पा रहे हैं। टाटा समूह के वकीलों ने यूनाइटेड किंगडम हाई कोर्ट में दाखिल दस्तावेजों में कहा है कि टाटा स्टील की ब्रिटिश शाखा को लिबर्टी हाउस ने बताया है कि कंपनी मई 2020 से ही मुश्किलों से जूझ रहा है। कोरोना महामारी के कारण स्टील की मांग को बड़ा झटका लगा है। कंपनी कारोबार में फंडिंग के लिए दूसरे विकल्प की तलाश कर रही है।