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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 14, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Tata Group : कर्ज कम करने के लिए टाटा समूह संपत्तियों को बेचने की बना रही योजना, 19000 करोड़ की है अचल संपत्ति

By Jitendra SinghEdited By:
Published: Sun, 14 Nov 2021 06:15 AM (GMT+05:30)Updated: Sun, 14 Nov 2021 12:02 PM (GMT+05:30)

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Tata Group : कर्ज कम करने को टाटा समूह संपत्तियों बेचने की बना रही योजना
Tata Group : कर्ज कम करने को टाटा समूह संपत्तियों बेचने की बना रही योजना

जमशेदपुर : भारत में सबसे बड़े औद्योगिक समूह में शुमार है टाटा समूह। जिसकी शुरूआत मुंबई में और पहली स्टील कंपनी की स्थापना झारखंड के जमशेदपुर से हुई थी। वर्तमान में टाटा समूह में 110 से अधिक कंपनियां संचालित है।

टाटा समूह नमक से लेकर सॉफ्टवेयर और हवाई सेवा से लेकर स्टील निर्माण व होटल व्यवसाय से भी जुड़ी हुई है। बाजार में चल रही है चर्चाओं की माने तो टाटा समूह अब देश-विदेश में संचालित सभी कंपनियों, होल्डिंग कंपनियों, ऑपरेशन कंपनियों के स्वामित्व वाली गैर प्रमुख अचल संपत्तियों का मूल्यांकन कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सभी कंपनियों के पास कितनी अचल संपत्ति है। इसमें कंपनी उपयोग वाली भूमि, आवासी व वाणिज्यिक अचल संपत्ति दोनों शामिल हैं।

1000 करोड़ रुपये जुटाने की है तैयारी

टाटा समूह की कंपनियां देश-विदेश में भी फैली हुई है। ऐसे में कंपनी ने अपनी सभी अचल संपत्तियों की पहचान करने और उसके वर्तमान मार्केट वैल्यू का पता लगाने के लिए एडवाइजरों की टीम नियुक्त किया है। कंपनी सूत्रों की माने तो टाटा समूह इन सर्वेक्षण में उन कंपनियों के ऑफिस व जमीन को बेचने की तैयारी कर रही है जिसका उपयोग टाटा समूह नहीं कर रही है। इसके माध्यम से टाटा समूह 1000 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी कर रहा है।

सरप्लस जमीन को बेचने की है तैयारी

टाटा समूह की कई ऐसी कंपनियां है जिनके पास सरप्लस जमीन है और उसका इस्तेमाल नहीं हो रहा है। ऐसे में टाटा समूह उन सभी सरप्लस जमीन को बेचने की तैयारी कर रहा है। इसमें पहला नाम आता है टाटा कम्युनिकेशंस लिमिटेड (टीसीएल) की जमीन।

समूह अब किसी भी सरप्लस अधिशेष अचल संपत्ति का निपटान करना चाहता है जो उसके किसी भी समूह फर्म में हो सकता है। इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड (आईएचसीएल), जो होटल और रिसॉर्ट चलाती है। इनके पास बड़ी संख्या में अचल संपत्ति की है, जिसका एक बड़ा हिस्सा ब्लॉक पर रखा जाएगा।

कर्ज कम करने में मिलेगी मदद

टाटा समूह अचल संपत्तियों की बिक्री से कर्ज को कम करने और कंपनी संचालन के लिए कैश फ्लो को पर्याप्त मात्रा में अपने पास रखने की योजना बना रही है। साथ ही यह भी माना जा रहा है कि टाटा समूह अपने नए ई-कॉमर्स व्यापार, सुपर एप को संचालित करने के लिए भी बड़ी मात्रा में कैश फ्लो की जरूरत पड़ेगी।

अचल संपत्तियों की बिक्री से कंपनी उक्त राशि का इस्तेमाल कर सकती है। इसके अलावा टाटा समूह ने पिछले माह ही एयर इंडिया का अधिग्रहण किया है जो घाटे में चल रही है। इसका संचालन करने के लिए भी टाटा समूह की पंजी की आवश्यकता होगी।

19,000 करोड़ है इस अचल संपत्ति की कीमत

पिछले साल, हेमिस्फेयर प्रॉपर्टीज, जो तत्कालीन विदेश संचार निगम लिमिटेड (अब टीसीएल) की अलग-अलग सरप्लस अचल संपत्ति है, ने कहा था कि वह अपने सरप्लस जमीन को बेच सकती है जिसका वर्तमान सर्कल दर 19,000 करोड़ रुपये है। इसके अलावा टाटा समूह अपने सभी होल्डिंग कंपनियों में भी इस तरह की संभावनाएं तलाश रही है जहां वह सरप्लस जमीन को बेच सके।

आपको बता दें कि हाल के दिनों में, टाटा संस ने कई कंपनियों को विस्तार देने और राइट्स इश्यू के माध्यम से टाटा मोटर्स लिमिटेड, टाटा स्टील लिमिटेड और टाटा पावर कंपनी लिमिटेड जैसी समूह कंपनियों में निवेश किया। इसके अलावा, टाटा संस ने टाटा डिजिटल और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे नए व्यवसायों में भी निवेश किया। किस कंपनी पर कितना कर्ज है, इसके आधार पर ही कई एजेंसियां कंपनी को रेटिंग देती है।

बोर्ड से ली जाएगी मंजूरी

टाटा समूह के वरीय अधिकारियों की माने तो जब सभी कंपनियों और सहायक कंपनियों के सरप्लस जमीन की पहचान हो जाएगी तब उन जमीनों को बेचने से पहले बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स से मंजूरी ली जाएगी। हालांकि इस पूरे मामले में टाटा संस के प्रवक्ता की ओर से किसी भी तरह की जानकारी नहीं दी गई है।