39 साल में पहली बार: Tata Cummins के 432 कर्मियों ने छोड़ा रियायती भोजन, घर के टिफिन को बनाया सहारा
जमशेदपुर स्थित टाटा कमिंस संयंत्र के 432 कर्मचारियों ने हालिया वेतन पुनरीक्षण से असंतुष्टि के चलते रियायती कैंटीन सुविधा छोड़कर ₹2,500 का नकद भत्ता लेने का फैसला किया है।

कर्मचारियों ने अत्याधुनिक रियायती कैंटीन की सुविधा छोड़कर प्रति माह 2,500 रुपये का नकद भत्ता लेने का फैसला किया है।
HighLights
टाटा कमिंस के 432 कर्मचारियों ने रियायती कैंटीन सुविधा छोड़ी।
वेतन पुनरीक्षण से असंतुष्टि के कारण ₹2,500 नकद भत्ता चुना।
कंपनी के 39 साल के इतिहास में यह पहला ऐसा प्रयोग है।
जासं, जमशेदपुर। जमशेदपुर स्थित टाटा कमिंस संयंत्र में हालिया वेतन पुनरीक्षण (LTS) के बाद एक अनोखा मामला सामने आया है।
कंपनी के लगभग आधे कर्मचारियों ने अत्याधुनिक रियायती कैंटीन की सुविधा छोड़कर प्रति माह 2,500 रुपये का नकद भत्ता लेने का फैसला किया है।
15 सितंबर की तय अंतिम समयसीमा तक संयंत्र के कुल 900 कर्मचारियों में से 432 कर्मियों ने लिखित आवेदन देकर कैंटीन व्यवस्था से अलग (Opt-out) होने की मुहर लगा दी।
वेतन समझौते से उपजी असंतुष्टि बनी मुख्य वजह
प्लांट में 1 अप्रैल 2026 से लागू चार वर्षीय वेतन समझौते के तहत ₹20,100 की कुल वेतन वृद्धि तय की गई है।
हालांकि, कर्मचारियों के एक बड़े वर्ग में यह भावना घर कर गई कि पड़ोसी ऑटोमोबाइल कंपनी 'टाटा मोटर्स' के वेज रिवीजन की तुलना में उन्हें कम वित्तीय लाभ मिला।
असंतोष के बीच कर्मचारियों ने महज ₹60 मासिक शुल्क में मिलने वाले नाश्ते, चाय और भोजन की सुविधा को त्यागकर ₹2,500 के नकद भत्ते को अपनी जेब मजबूत करने का जरिया बना लिया।
31 मार्च 2027 तक नहीं होगी कैंटीन में वापसी
प्लांट के 39 साल के इतिहास में भोजन के बदले कैश अलाउंस का यह पहला प्रयोग है। कंपनी के नियमानुसार, जिन कर्मचारियों ने ₹2,500 भत्ते का विकल्प चुना है।
वे अब 31 मार्च 2027 तक दोबारा रियायती कैंटीन सुविधा में शामिल नहीं हो सकेंगे। इन कर्मचारियों ने अब घर से टिफिन लाने को प्राथमिकता दी है।
छह महीने बाद होगी व्यवस्था की समीक्षा
यदि कोई कर्मचारी कभी-कभार कैंटीन में खाना चाहेगा, तो उसे बाजार दर पर कूपन खरीदना होगा। हालांकि, नाइट शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारियों को पूर्व की भांति मुफ्त फूड पैकेट मिलते रहेंगे।
अत्याधुनिक कैंटीन के बावजूद 48 प्रतिशत से अधिक कर्मियों का इससे दूरी बनाना प्रबंधन और यूनियन दोनों के लिए हैरत की बात है।
यूनियन सूत्रों के मुताबिक, इस नए प्रयोग को छह महीने तक परखा जाएगा। इस दौरान कर्मचारियों के स्वास्थ्य, कार्यस्थल पर उत्पादकता और व्यवस्था की व्यवहारिकता का आकलन करने के बाद ही आगे कोई समीक्षा या फेरबदल किया जाएगा।
