जमशेदपुर (वेंकटेश्वर राव)। कोल्हान विश्वविद्यालय छात्रों से खेल मद में प्रत्येक साल 100 रुपये की वसूली करता है। विश्वविद्यालय में लगभग 80 हजार छात्र अध्ययनरत है। नौ साल में विश्वविद्यालय को नियमानुसार छात्रों से दो करोड़ 40 लाख रुपये प्राप्त हो चुके हैं। इसके बावजूद कोल्हान विश्वविद्यालय ने अब तक खेल कोष का अलग से गठन नहीं किया।

विश्वविद्यालय खेल के लिए अलग से बजट भी निर्धारित नहीं किया गया। इस कारण शहर और देश-विदेश में होने वाली प्रतियोगिताओं के लिए धनराशि के लिए जब जरूरत पड़ती है तो फाइलें घूमती रह जाती हैं और धनराशि स्वीकृत नहीं हो पाती है।

मजबूरन टीम के मैनेजरों को अपनी राशि लगाकर खिलाड़ियों को ले जाना पड़ता है या फिर चंदा एकत्र कर। विश्वविद्यालय द्वारा खेल प्रभारी तो नियुक्त कर दिया जाता है, लेकिन वह नाम मात्र का होता है। बस बिल और वाउचर में साइन करने के लिए उन्हें नियुक्त किया जाता है। अपने स्तर से उन्हें एक भी रुपया खर्च करने की आजादी है। इसके उलट अन्य विश्वविद्यालयों में खेल पदाधिकारियों को राशि खर्च करने का अधिकार होता है। खेल बजट भी अलग से मांग की जाती है।

केयू ने अलग से खेल बजट की मांग भी सरकार से नहीं की है। सब कुछ छात्रों से ली गई राशि से खेलकूद का आयोजन होता है। सिंडिकेट सदस्य अमिताभ सेनापति, मनोज सिंह ने खेल को बढ़ावा देने के लिए अलग से खेल कोष की स्थापना की मांग कर चुके हैं। सिंडिकेट व सीनेट की बैठक में यह बातें उठ चुकी है।

यह भी जानें

♦कोल्हान विश्वविद्यालय में लगभग 80 हजार छात्र पढ़ते हैं

♦प्रत्येक छात्रों से एक-एक सौ रुपये खेल मद के शुल्क के रूप में लिया जाता है

♦एक साल में केयू को इस मद में मिलते हैं 80 लाख

♦इस 80 लाख में विवि अपने पास रखता है 30 प्रतिशत राशि

♦9 साल में विवि के पास जमा हुए 2 करोड़ 40 लाख

♦खेलकूद प्रतियोगिताओं में इसी मद से खर्च की जाती है राशि

♦अब तक केयू खर्च कर चुका है एक करोड़ 35 लाख की रकम

Posted By: Vikas Srivastava

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