संवाद सहयोगी, घाटशिला : जिदगी हर कदम एक नई जंग है, जीत जाएंगे हम, तू अगर संग है। आज पूरा देश ही नहीं बल्कि पूरा विश्व एक-दूसरे से कुछ ऐसी ही उम्मीद लगाए बैठा है। ऐसे में हिदी फिल्म के इस गीत का महत्व हर किसी को समझना चाहिए। हम घर पर सुरक्षित हैं। हमारे लिए कोरोना वायरस का खतरा उठाकर डॉक्टर, सेना, पुलिस, सफाई कर्मी, पत्रकार सभी अपना फर्ज बखूबी निभाने में जुटे है। इस राष्ट्रीय आपदा में सबसे बड़ी भूमिका स्वास्थ्य कर्मियों की है जिन पर लाखों-करोड़ों देशवासियों की जान बचाने के साथ-साथ कोरोना को मात देने की जिम्मेदारी आन पड़ी है।

इस मुहिम में पूर्वी सिंहभूम जिला के घाटशिला अनुमंडल अस्पताल के तीन महिला कम्यूनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) कोरोना फाइटर्स के रूप में उभर कर सामने आई हैं तथा आपदा की इस घड़ी में जनहानि रोकने के लिए हरसंभव प्रयास के साथ दिन-रात एक किए हुए हैं। सर्विलांस टीम में शामिल तीनों सीएचओ पोमा हांसदा, बेलंती नायक व स्नेहा रानी वर्तमान परिस्थिति में रोजना पांच से छह लोगों की न सिर्फ स्वास्थ्य जांच कर रही हैं बल्कि उन्हें होम क्वारंटाइन की सुविधा मुहैया कराकर उनके स्वास्थ्य पर नजर भी रख रही हैं। काबिलेगौर बात यह है कि इनके पास कोई अत्याधुनिक स्वास्थ्य उपकरण नहीं होने के बावजूद सिर्फ मास्क, हैंड ग्लब्स जैसे सुरक्षा कवच केभरोसे ही यह अपनी जान की परवाह किए बगैर संकट की इस घड़ी में सेवा देने में जुटी है। साथ ही लोगों को लॉकडाउन का पालन कर खुद सुरक्षित रह, देश व राष्ट्र को सुरक्षित रखने को प्रेरित करती हैं।

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ऐसे समय काम के वक्त डर तो लगता है लेकिन डयूटी है। हम अपने दायित्व से भाग नहीं सकते है। मन में है कि समाज के लिए कुछ कर सकू। इसलिए अपनी सेवा दे रही हूं। इस वायरस से लड़ने में लोग भी सतर्क रहे। घरों से बाहर न निकले। बाहर से अगर कोई आए है तो उस बात को न छूपाए। जागरूक व जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाएं। देश का सहयोग करे।

पोमा हांसदा, कम्युनिटी हेल्थ आफिसर

Posted By: Jagran

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