जमशेदपुर(जासं) । ऐसा कहा जाता है कि असंभव और संभव के बीच का अंतर मनुष्य के दृढ़ संकल्प में निहित होता है और हमारी नियति दृढ़ संकल्प की आग में तपती है। साहस से आत्मविश्वास तक, दृढ़ता से पूर्णता तक की कहानी है 35 वर्षीय स्पेशल एथलीट प्रशांत सिन्हा का।

  प्रशांत को सेरेब्रल पल्सी से ग्र्रसित है। यह एक तंत्रिका संबंधी जन्मजात विकार है, जो पीडि़त की हरकत, मोटर स्किल और मांसपेशी की दशा को प्रभावित करता है। इसमें दिमाग व शरीर का संतुलन नहीं होता है, जिससे न सिर्फ चलने-फिरने बल्कि सोचने-समझने की शक्ति भी प्रभावित होती है। प्रशांत बैडमिंटन खेलते हैं और एक पूर्णतया समर्पित मैराथन धावक हैं। स्पेशल एथलीट प्रशांत ने राष्ट्रीय बैडमिंटन टूर्नामेंट में 22 बार हिस्सा ले चुके हैं। वे पिछले तीन सालों से रोजाना 10 किलोमीटर दौड़ते हैं।

ये है प्रशांत की चाहत

नोआमुंडी रन-ए-थॉन की तैयारी कर रहे प्रशांत ने कहा, मैं यह दिखाना चाहता हूं कि अक्षमता नामक कोई चीज नहीं है। जितना सामान्य होना चाहिए, मैं उतना सामान्य हूं। मुझे टाटा स्टील नोआमुंडी रन-ए-थॉन के बारे में पता चला कि स्पेशल एथलीटों के लिए भी यहां दौड़ होती है। मैं अन्य प्रतिभागियों के साथ 10के वर्ग में 'जैव विविधता के लिए दौड़ में हिस्सा लूंगा। टाटा स्टील जमशेदपुर रन-ए-थॉन की शुरुआत के बाद से मैं मैराथन दौड़ रहा हूं। इस साल, टाटा स्टील नोआमुंडी रन-ए-थॉन 28 अक्टूबर को आयोजित किया जाएगा।

 

Posted By: Rakesh Ranjan

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस