जागरण संवाददाता, जमशेदपुर : केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तावित नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर धतकीडीह कम्युनिटी सेंटर में रविवार को सेमिनार हुआ। यह सेमिनार अखिल भारतीय शिक्षा बचाओ कमेटी की पूर्वी सिंहभूम जिला कमेटी की ओर से किया गया। इसमें कई शिक्षा नीतियों को गलत बताया गया और वक्ताओं ने चिंता जाहिर की। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित घाटशिला कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बीएन प्रसाद ने कहा कि नई शिक्षा नीति में आठवीं एवं 12 तक बोर्ड परीक्षा की बात की जा रही है। लेकिन दसवीं के बाद ही हजारों छात्र ग्रेड फोर व सेना में आवेदन करते हैं। यहां छात्रों क पढ़ाई छूट सकती है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि एजुकेशनल लोन प्रोसेस लंबा चौड़ा है, इसे और सरल बनाने की जरूरत है। इसमें वर्तमान में 14 प्रतिशत इंटरेस्ट चला जाता है। एजुकेशन लोन पर इंटरेस्ट कम होना चाहिए। नई शिक्षा नीति के प्रारूप में को-एजुकेशन पर बात तो की जा रही है, लेकिन महिला शिक्षा की बातें नहीं की गई, इस पर सुधार होना चाहिए। ऑटोनमी पर सरकार की सोच अच्छी है। लेकिन सरकार को वेलफेयर स्टेट के रूप में काम करना चाहिए, ताकि कम पैसा में शिक्षा ग्रहण करने का प्रावधान उपलब्ध हो सके। यह बहुत जरूरी है।

सेमिनार में मैट्रिक परीक्षा समाप्त करने, प्री प्राइमरी एजुकेशन आंगनबाड़ी केंद्रों के हाथों में सौंपने, स्कूल मर्जर करने, सभी कॉलेजों को ऑटोनोमस करने व निजीकरण करने, 3 साल की डिग्री कोर्स व 3 साल के बीएड कोर्स को चार साल करने के प्रस्तावों का विरोध किया गया। प्री प्राइमरी शिक्षा शुरू करने के प्रस्ताव का स्वागत भी किया गया। सभी सुझावों को लिपिबद्ध किया गया और 24 जुलाई को मानव संसाधन विकास मंत्रालय के पास सारे सुझावों को भेजा जायेगा।

इस सेमिनार में मानवाधिकार कार्यकर्ता जवाहरलाल शर्मा, केएमपीएम इंटर कॉलेज के डॉ. आशुतोष झा, वर्कर्स कॉलेज के प्रोफेसर अख्तर हसनैन, ग्रेजुएट कॉलेज के डॉ. किरण शुक्ला, मानवाधिकार कार्यकर्ता निशांत अखिलेश, पारा शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष सुमित तिवारी, शिक्षक संघ के नेता सुनील कुमार, साहित्यकार अशोक शुभदर्शी, उदय हयाद सहित कई शिक्षाविद उपस्थित थे। सेमिनार का संचालन झारखंड शिक्षा बचाओ कमेटी के सचिव सुमित राय ने की।

Posted By: Jagran

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