अवनीश कुमार, जमशेदपुर। हर मौसम की कुछ खास चीजें होती हैं, जो मन को खूब भाती हैं। स्वादिष्ट लगती हैं। इन्हीं में से एक है अनरसा। इसे गांव में बरसाती मिठाई भी कहकर लोग पुकारते हैं। चावल के आटा से बनने वाला अनरसा बरसात के मौसम में काफी पसंद किया जाता है। यही कारण है कि इसे बरसाती मिठाई भी कहा जाता है।

स्वाद में सोंधा और कुरकुरा लगने वाला अनरसा हर उम्र के लोगों को भाता है। बच्चे खूब पसंद करते हैं। शहर के साकची स्थित जलेबी लाइन स्थित मिठाई दुकानदार छोटेलाल गुप्ता बताते हैं कि यूं तो यह उत्तर भारत की पारंपरिक मिठाई है, लेकिन बिहार के गया जिले के तिलकुट के साथ अनरसा भी काफी मशहूर है। बारिश शुरू होते ही इस मिठाई की मांग बढ़ जाती है। 80 से 100 रुपये प्रति किलो की दर से अभी बाजार में यह बिक रहा है। अधिकतर घरों में बनने के कारण बाजार में इसके ग्राहक कम ही होते हैं।

बनाने के लिए जरूरी चीजें
चावल का आटा, चीनी, तिल, दूध, खोआ, सूखा नारियल, बादाम, और घी।

बनाने की विधि
अनरसा बनाने के लिए चावल को साफ कर लें। फिर उसे धो लें। पानी सूखने तक छोड़ दें। फिर उसे मिक्सी में पीस लें। ध्यान रहे कि आटा बहुत महीन हो। आटे में दूध, घी, चीनी पाउडर, खोआ, बारीक कटा हुआ सूखा नारियल मिलाकर गूंथ लें। जरूरत पड़ने पर पानी भी लिया जा सकता है। गूंथे आटे को कुछ देर छोड़ दें। इसके बाद आटे की छोटी टिकड़ी बनाकर हथेली पर चिपटा कर लें। उसे तिल में लपेट लें। कड़ाही में घी को गर्म करें। उसमें उसे डालकर मध्यम आंच पर तबतक तलें जब तक कि वह ब्राउन नहीं दिखने लगे। बंद डब्बे में रखकर इसे दस से पन्द्रह दिनों तक खाया जा सकता है।

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