मुख्‍य बातें

  • घुवर की झोली से मालिकाना मुद्दे को छीन सरयू ने बनाया हथियार
  •  क्षेत्र को एक परिवार के आतंक से मुक्त कराने का भरोसा काम आया
  • कैबिनेट मंत्री रहते हुए रघुवर सरकार का छुड़ाते रहे पसीना
  • तीन-तीन मुख्यमंत्री को जेल भेजने में निभा चुके भूमिका 
  • भ्रष्टाचार से लडऩे की छवि से जनता के बने हीरो
  • रघुवर व उनके परिवार के प्रति क्षेत्र में काफी थी नाराजगी

जमशेदपुर, जासं।  Jamshedpur east Jharkhand Election Result 2019 जिस जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा क्षेत्र को भाजपा और रघुवर दास का अभेद्य किला माना जाता था, उसे सरयू राय ने एक झटके में ढाह दिया। सरयू की जीत ने इस मिथक को तोड़ दिया कि जमशेदपुर पूर्वी से भाजपा को कोई नहीं हरा सकता। वैसे, रघुवर दास की हार की पटकथा उसी दिन लिख दी गई थी, जिस दिन सरयू राय का टिकट कटा।

इसके लिए उन्होंने सीएम को जिम्मेदार बताते हुए उनके खिलाफ ही लडऩे की घोषणा कर दी थी। जमशेदपुर पश्चिम से दो बार विधायक रह चुके सरयू का टिकट जब भाजपा की चौथी सूची में भी नहीं आया, तो सरयू ने उसी दिन घोषणा कर दी कि वे अब जमशेदपुर पूर्वी से मुख्यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ ही चुनाव लड़ेंगे। इस घोषणा के साथ ही जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा क्षेत्र में रघुवर से नाराज मतदाता गोलबंद होने लगे। सरयू राय नामांकन के दिन से ही पूर्वी में दिन-रात पसीना बहाने लगे, लेकिन बमुश्किल दस दिन में ही उन्हें इतना समर्थन मिल जाएगा, किसी को यकीन नहीं था। 

फेंका पासा काम कर गया

सरयू ने पांच बार से विधायक चुने जा रहे रघुवर दास को हराने के लिए जो पासा फेंका, वह अब तक रघुवर के लिए अचूक हथियार बना हुआ था। वर्षों से क्षेत्र की करीब सवा सौ अवैध बस्तियों (86 बस्ती) को मालिकाना हक दिलाने का लॉलीपॉप दिखाकर जीतने वाले रघुवर छठी बार इसी मुद्दे पर फिसल गए। सरयू राय ने वहां की जनता को विश्वास दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब दिल्ली की अवैध बस्तियों को मालिकाना दिला सकते हैं, तो यही काम यहां क्यों नहीं हो सकता। सरयू इस बात को जोर-शोर से प्रचारित करने लगे कि प्रधानमंत्री जिस चीज को कर चुके, मुख्यमंत्री उसी को असंभव बता रहे हैं। मुख्यमंत्री मालिकाना हक देना ही नहीं चाहते। यही प्रचार काम कर गया।

भ्रष्टाचार से लडऩे की छवि ने बना दिया सरयू को हीरो

सरयू ने जिस तरह कैबिनेट मंत्री रहते हुए रघुवर सरकार के खिलाफ लगातार सवाल खड़े किए, उससे सरयू की छवि भ्रष्टाचार के खिलाफ लडऩे वाले की बनी। सरयू ने क्षेत्र के लोगों को यह भी भरोसा दिलाया कि उनके कारण ही तीन-तीन मुख्यमंत्री (लालू प्रसाद, जगन्नाथ मिश्रा और मधु कोड़ा) जेल जा चुके हैं, और भी जा सकता है। इन उदाहरणों से रघुवर दास और उनके परिवार से नाराज लोगों को सरयू 'नायक ' फिल्म के हीरो नजर आने लगे। 

कैबिनेट मंत्री रहते हुए सीएम से बनी रही दूरी

रघुवर सरकार में कैबिनेट मंत्री होते हुए भी सरयू राय की मुख्यमंत्री से दूरी बनी रही। दोनों में खटास उसी दिन से पैदा हो गई थी, जब सरयू राय को करीब चार माह बाद मंत्री बनाया गया। मंत्री बनाने के बाद भी विभागीय अधिकारियों का सहयोग नहीं मिलने से सरयू राय खिन्न रहने लगे। उन्होंने कई बार इसका सार्वजनिक रूप से इजहार भी किया। अंत में तो भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को पत्र लिखकर सरयू ने कह दिया कि ऐसी सरकार में रहते हुए उन्हें शर्मिंदगी महसूस होती है।

कैबिनेट की बैठकों से रहने लगे थे दूर

अंत में करीब एक साल पहले सरयू ने संसदीय कार्य मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। सरयू कैबिनेट की बैठकों से दूर रहने लगे, विधानसभा सत्र में भी जाना छोड़ दिया था। सरकारी कार्यक्रमों-बैठकों में भी सरयू नहीं जाते थे। मुख्यमंत्री से उनकी दूरी तब दिखी, जब लोकसभा चुनाव के दौरान एग्रिको मैदान में हुई अमित शाह की सभा से सरयू रघुवर के आते ही निकल गए थे। अंतिम बार रघुवर व सरयू विधानसभा चुनाव से पहले जोहार जनआशीर्वाद यात्रा में नजर आए थे। मानगो चौक से मुख्यमंत्रीे के साथ सरयू राय करीब 100 मीटर दूर तक गए थे। 

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