नदी नहीं, मैला ढोने वाली मालगाड़ी बना दिया: सरयू राय का बड़ा बयान, एंटीबायोटिक दवाओं से जहरीली हो रहीं नदियां
विश्व नदी दिवस पर जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने नदियों में बढ़ते रासायनिक और जैविक प्रदूषण, विशेषकर एंटीबायोटिक अवशेषों पर गंभीर चिंता जताई है।

मानव शरीर से उत्सर्जित होने वाले एंटीबायोटिक दवाओं के अवशेष नालों के जरिए स्वर्णरेखा समेत अन्य नदियों में पहुंचकर जल को विषाक्त बना रहे हैं।
HighLights
विधायक सरयू राय ने नदी प्रदूषण पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
एंटीबायोटिक अवशेषों से स्वर्णरेखा नदी विषाक्त हो रही है।
'नाला आधारित विकास मॉडल' अपनाने की सरकार से अपील।
जासं, जमशेदपुर। विश्व नदी दिवस के अवसर पर जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने नदियों में बढ़ते रासायनिक और जैविक प्रदूषण को लेकर गंभीर चिंता जताई है।
उन्होंने चेतावनी दी कि मानव शरीर से उत्सर्जित होने वाले एंटीबायोटिक दवाओं के अवशेष नालों के जरिए स्वर्णरेखा समेत अन्य नदियों में पहुंचकर जल को विषाक्त बना रहे हैं।
इसे जल पारिस्थितिकी (Aquatic Ecology) के लिए एक नया और गंभीर खतरा बताते हुए उन्होंने सरकार से विकास की पारंपरिक रूपरेखा बदलकर 'नाला आधारित विकास मॉडल' अपनाने का आग्रह किया है।
जीवनदायिनी नदी को बना दिया मैला ढोने वाली मालगाड़ी
सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात रखते हुए सरयू राय ने कहा कि लोग बिना सोचे-समझे या चिकित्सीय सलाह पर भारी मात्रा में एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन कर रहे हैं।
समुचित सीवरेज ट्रीटमेंट (शोधन) के अभाव में इन दवाओं के अवशेष घरेलू गंदे पानी के साथ सीधे नदियों में समा रहे हैं। उन्होंने क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा कि जिस नदी को हम मां कहते हैं, उसे हमने मैला ढोने वाली मालगाड़ी बना दिया है।
शरीर से लेकर उद्योगों तक का कचरा नदियों में उड़ेलना हमारी सांस्कृतिक चेतना के पतन का प्रतीक है। उन्होंने जमशेदपुर के समग्र विकास के लिए दो बड़े नालों के बीच बसी आबादी के सीवेज निस्तारण का वैज्ञानिक खाका तैयार करने की वकालत की।
उद्गम क्षेत्र पर कब्जे और अधूरी परियोजनाओं पर उठाए सवाल
नदियों के प्राकृतिक स्वरूप के साथ हो रही छेड़छाड़ पर कड़ा प्रहार करते हुए विधायक ने कहा कि स्वर्णरेखा के उद्गम स्थल पर नदी की जमीन पर खेती कर रैयती दावे किए जा रहे हैं।
वहीं, रांची में नदी तट पर सरकारी फंड से शौचालयों का निर्माण प्रशासन की असंवेदनशीलता का चरम उदाहरण है। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 1935 में डॉ. राजेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता में नदी नियंत्रण को लेकर बनी सिफारिशों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
पर्यावरण और भूजल संचयन पर जोर
उन्होंने बहुचर्चित स्वर्णरेखा परियोजना के तहत ईचा डैम के अब तक न बन पाने पर भी सवाल खड़े किए। सरयू राय ने आगाह किया कि जंगलों की अंधाधुंध कटाई से नदियों का प्राकृतिक प्रवाह सूख रहा है।
उन्होंने भूजल संचयन और नदियों के संरक्षण के लिए पीपल, बरगद और पाकुड़ जैसे पारंपरिक वृक्ष लगाने की आवश्यकता पर बल दिया।
इसके साथ ही उन्होंने बोकारो और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों से दामोदर नदी में लगातार बढ़ रहे औद्योगिक प्रदूषण पर भी तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की मांग की।
