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संथाल समाज की हुंकार: दो महीने में राष्ट्रपति और पीएम को भेजे जाएंगे सरना धर्म कोड के 10 लाख मांग पत्र

By Ch Rao Edited By: Sanjeev Kumar
Published: Thu, 22 Oct 2026 01:09 AM (IST)

संथाल समाज ने सरना धर्म कोड को आधिकारिक मान्यता देने और मारांग बुरु व लुगु बुरु को तीर्थस्थल घोषित करने ...और पढ़ें

देश पारानिक बाबा दुर्गा चरण मुर्मू ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे पूर्वजों ने गहन विचार-विमर्श के बाद ही मजबूत माझी पारगना व्यवस्था की स्थापना की थी।

देश पारानिक बाबा दुर्गा चरण मुर्मू ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे पूर्वजों ने गहन विचार-विमर्श के बाद ही मजबूत माझी पारगना व्यवस्था की स्थापना की थी।

HighLights

  1. मारांग बुरु, लुगु बुरु को तीर्थस्थल घोषित करने की मांग।

  2. दाखिन हांसदा, कुड़ा हांसदा को देश पारगना पद मिला।

जासं, जमशेदपुर। पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड से सटे ओडिशा के तिरिंग स्थित आसेका भवन में बुधवार को माझी पारगना माहाल की बैठक आयोजित की गई। 
 
तिरिंग पीड़ पारगना बाबा छोटराय हेंब्रम की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में भोंज दिशोम उत्तर नाखा के रिक्त देश पारगना पद पर दाखिन हांसदा और कुड़ा हांसदा को अहम जिम्मेदारी सौंपी गई। 
 
इस दौरान उन्हें देश पारगना की पारंपरिक पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया। समारोह के दौरान तिरिंग, दाड़िमा, ढेंका, खासदेश, जामदा, गोडताल, उपोरबेड़ा, पाड़सा, बासला, माघुवा और सारंडा पीड़ के पारगना बाबाओं को भी पगड़ी पहनाई गई, जिन्होंने समाज के सर्वांगीण विकास के लिए निस्वार्थ भाव से सेवा करने का संकल्प लिया।
 
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए धाड़ दिशोम के देश पारानिक बाबा दुर्गा चरण मुर्मू ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे पूर्वजों ने गहन विचार-विमर्श के बाद ही मजबूत माझी पारगना व्यवस्था की स्थापना की थी। 
 
इसी पारंपरिक व्यवस्था के बलबूते संथाल समाज आज भी अपनी सामाजिक, धार्मिक और न्याय व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित कर रहा है। 
 
उन्होंने युवा पीढ़ी से आह्वान किया कि वे अपनी समृद्ध संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं से जुड़े रहें, शिक्षा को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाएं और समाज को सशक्त बनाने के लिए हर प्रकार के नशे से पूरी तरह दूर रहें।
 
बैठक में समाज से जुड़े कई गंभीर मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान सरना धर्म कोड की आधिकारिक मान्यता के लिए आगामी दो महीनों के भीतर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और भारत के रजिस्ट्रार जनरल को 10 लाख मांग पत्र भेजने का बड़ा आह्वान किया गया।
 
इसके साथ ही, पवित्र स्थल मारांग बुरु और लुगु बुरु को संथाल समाज के प्रमुख तीर्थस्थलों के रूप में आधिकारिक तौर पर अधिसूचित करने की पुरजोर मांग उठाई गई। बैठक में बड़ी संख्या में समाज के प्रतिनिधि और प्रबुद्ध जन उपस्थित थे।