सुवर्ण वणिक समाज शहर में संगठित होकर निरंतर विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। मूल रूप से झारखंड के ही रहने वाले समाज के लोग आजादी के बाद वर्ष 1948-49 में रोजगार के लिए जमशेदपुर आए। उस वक्त तत्कालीन संयुक्त सिंहभूम और आसपास के जिलों के अलावे पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्र से समाज के लोग शहर आए थे।

झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिला के अलावे सरायकेला-खरसवां, बोकारो, रांची, जामताड़ा आदि समेत अन्य जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में सुवर्ण वणिक समाज के लोग निवास करते हैं। शहर में रहने वाले समाज के लोगों का साक्षरता दर 50 प्रतिशत है। समाज में उच्च शिक्षा के लोग कम है। आर्थिक पिछड़ेपन के कारण समाज के लोग उच्च शिक्षा हासिल नहीं कर पा रहे हैं। शहर में इनकी आबादी 25 से 30 हजार के करीब है, जबकि पूरे जिले में 45 से 50 हजार की आबादी है। खतियान नहीं रहने के कारण जिला में समाज के लोगों का जाति प्रमाण पत्र नहीं बन रहा है।

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सोना को आकर्षक रूप देने वाले हाथ को काम नहीं

सोना के कारीगर सुवर्ण वणिक समाज के लोगों का रोजगार आधुनिक मशीनों ने छीन लिया है, जिंदा रहते सोना को आकर्षक रूप से तराशने वाले इनके हाथ बेरोजगार चुके हैं। समाज के कुछ लोग नौकरी में भी है। मुख्यत: प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक, लिपिक, चतुर्थवर्गीय कर्मचारी आदि के रूप में कार्यरत हैं। अधिकांश लोग छोटे-छोटे सोना-चांदी के दुकानों में कारीगरी, फेरी, फुथपाथ या दैनिक मजदूरी करने पर मजबूर हैं।

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धूमधाम से करते हैं मां बाघेश्वरी की पूजा

सुवर्ण वणिक समाज की कुलदेवी मां बाघेश्वरी है। शहर के बाराद्वारी, कदमा और निर्मल नगर समाज के लोग धूमधाम से पूजा का आयोजन करते हैं। शहर में समाज का प्रधान कार्यालय बाराद्वारी में है। इसके अलावे कदमा में भी सामज का भवन निर्माणाधीन है। प्रतिवर्ष धूमधाम के साथ होने वाले बाघेश्वरी पूजा में राज्य के मंत्री, सांसद, विधायक समेत शहर के प्रबुद्ध शामिल होते हैं।

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नेताजी जयंती पर करते हैं रक्तदान शिविर

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती 23 जनवरी पर समाज के लोग प्रतिवर्ष रक्तदान शिविर का आयोजन करते हैं। इसके साथ ही 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस व 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस का आयोजन समाज के कार्यालय में धूमधाम के साथ किया जाता है। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को समाज प्रतिभा सम्मान आयोजित कर सम्मानित करता है।

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सरकार ने समाज के लोगों को दो भागों में बांट दिया है। राज्य सरकार सोनार को ओबीसी का लाभ दे रही है, जबकि सुवर्ण वणिक को इसका लाभ नहीं दिया जा रहा है। दोनों ही एक जाति है। इसके साथ ही खतियान नहीं रहने के कारण लोगों को जाति प्रमाण पत्र नहीं मिल रहा है, जबकि कार्मिक विभाग के नियमानुयार जांचोपरांत उन्हें भी जाति प्रमाण पत्र निर्गत किया जा सकता है जिनका खतियान नहीं है। आर्थिक पिछड़ापन समाज के विकास में मुख्य बाधक है।

- हरिशंकर दत्ता, केंद्रीय महासचिव, सुवर्ण वणिक समाज, झारखंड

By Jagran