जमशेदपुर, जागरण संवाददाता। विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों के कारण देश के अनेक जेलों में बड़ी संख्या में सरकारों ने सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओें को बंदी बना रखा है। उन्हें सरकारें तरह-तरह से प्रताड़ित कर रही है। यह लोकतंत्र की सेहत के लिए ठीक नहीं है। प्रतिशोध की राजनीति का प्रतिवाद जरूरी है। उक्त बातें "शहीद स्मृति रक्षा समिति" एवं “कम्युनिस्ट कंसोलिडेशन" की सभा में वक्ताओं ने कहीं।

यह सभा 25 जुलाई 1971 में हजारीबाग जेल में शहीद हुए 16 शहीदों एवं नक्सलवाड़ी आंदोलन के शहीदों की याद में आयोजित की गई थी। झाबरी बस्ती सामुदायिक भवन सोनारी में आयोजित सभा में वक्ताओं ने कहा कि अंग्रेजों के खिलाफ शुरू हुई क्रांतिकारियों की शहादत का सिलसिला आजादी के बाद भी जारी है। आज यह मजदूर, किसान, छात्र, युवा व आम जनता के खिलाफ पूंजीवादी हमले और शासकीय अत्याचार के रूप में तब्दील हो गया है । इसलिए शहीद भगत सिंह और खुदीराम बोस जैसों की शहादत और नक्सलवाड़ी का वर्ग संघर्ष इसी कड़ी में जुड़ गया है। नक्सलवाड़ी आंदोलन में लाखों मजदूर, किसान, छात्र, युवा शामिल हुए । हजारों की संख्या में क्रांतिकारियों ने अपनी जान न्योछावार कर दिया।

सभा में इनकी रही मौजूदगी

सभा में मुख्य अतिथि के रूप में जेपी सिंह मौजूद थे। कार्यक्रम की शुरुआत में शहीद वेदी पर माल्यापर्ण, पुष्प अर्पण एवं शहीदों के याद में एक मिनट का मौन रखा गया । पश्चिम बंगाल के वर्द्धमान से आए निवारण चन्द्र बोस ने कहा कि देश में आज जिस तरह के हालात हैं उसे देखते हुए नक्सलबाड़ी राजनीति आज भी प्रासंगिक है। कार्यक्रम का संचालन तपन कुमार ने किया। उपस्थित सभी वक्ताओं ने एक स्वर से तमाम राजनैतिक बंदियों को रिहा करने, बेरोजगारों को नौकरी देने, महंगाई व मूल्य वृद्धि रोकने, दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन का उचित समाधान करने, महिला उत्पीड़न रोकने, लॉकडाउन के नाम पर शोषण बंद करने की मांग की । सभा में ओम प्रकाश सिंह, पार्थो,  शंकर राय, सुलोचना, श्यामल बनर्जी, अर्पिता श्रीवास्तव, कुलकर्णी, भोला, पटेल, शिबू, शिशिर, गणेश,  लखाई, रूपम, भरत यादव ने भी अपना विचार व्यक्त किया । इस अवसर पर किशन राय ने गीत प्रस्तुत किया।

 

Edited By: Rakesh Ranjan